श्रीनगर , मार्च 16 -- जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि वसंत ऋतु के आगमन और प्रसिद्ध ट्यूलिप गार्डन को पर्यटकों के लिए खोले जाने से कश्मीर में पर्यटन गतिविधियों को नयी गति मिलेगी।

श्री अब्दुल्ला ने यहां संवाददताओं से बातचीत में कश्मीरी कहावत "वांदे चले शीन गली, बेई यी बहार" का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्दी के बाद आने वाला बसंत उम्मीद और नयी शुरुआत का प्रतीक है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि वसंत के मौसम में कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है, जो देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है। मौसम सुहावना है, चारों ओर बर्फ, बारिश और फूलों की खुशबू है तथा उम्मीद है कि इस सप्ताह शुरू हुआ वसंत पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी नयी उम्मीद लेकर आएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष अप्रैल में इस उद्यान में लगभग 8.25 लाख पर्यटक आए थे , हालांकि 26 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मृत्यु के बाद घाटी में पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। पर्यटन क्षेत्र ने कठिन समय का सामना किया है, लेकिन मौसम बदलने के साथ स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।

श्री अब्दुल्ला ने बताया कि इस वर्ष उद्यान में कुछ नयी छतरियां और फूलों की क्यारियों की डिजाइन में बदलाव किया गया है। इसके अलावा स्मारिका दुकान से जुड़ी नयी व्यवस्था भी की गई है, जिससे पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि ट्यूलिप गार्डन का खुलना कश्मीर के मुख्य पर्यटन सत्र की शुरुआत का संकेत माना जाता है।

ट्यूलिप बल्बों के स्थानीय उत्पादन की संभावना पर उन्होंने कहा कि शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय इस दिशा में काम कर रहा है और यदि घाटी में ही बल्ब तैयार होने लगें तो नीदरलैंड से आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी तथा पुष्प उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने उद्यान को तैयार करने में लगे उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

नीदरलैंड से ट्यूलिप के बल्ब आयात करने के बजाय उन्हें स्थानीय स्तर पर विकसित करने की संभावना पर उन्होंने कहा कि शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ़ कश्मीर जैसे संस्थान पहले से ही घाटी के भीतर ट्यूलिप के बल्बों को उगाने के प्रस्तावों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर हम ट्यूलिप के बल्बों को स्थानीय स्तर पर विकसित करने में सफल हो जाते हैं, तो इससे नीदरलैंड से आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाने में मदद मिलेगी और यहां के फूलों के उद्योग को और बढ़ावा मिलेगा।"पर्यटकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार एजेंसियाँ अपना काम कर रही हैं और वे घाटी भर के सभी पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

गौरतलब है कि जबरवान पर्वतमाला की तलहटी में स्थित यह ट्यूलिप गार्डन आमतौर पर मार्च के अंतिम सप्ताह में खोला जाता था, लेकिन इस वर्ष फरवरी में तापमान बढ़ने के कारण इसे पहले ही खोल दिया गया।

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