पटना , मार्च 13 -- बिहार में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों में बेहतर यातायात प्रबंधन और सुचारू ट्रैफिक बहाल करने से संबंधित मानकों को लागू किया गया है।
राज्य में औसतन प्रतिवर्ष 11 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें नौ से साढ़े नौ हजार लोगों की मौत हो जाती है। इन आंकड़ों में प्रतिवर्ष कम से कम 10 फीसदी की कमी लाने के उदेश्य से राज्य के सभी जिलों में बेहतर यातायात प्रबंधन और सुचारू ट्रैफिक बहाल करने से संबंधित मानकों को लागू किया गया है। इससे संबंधित 10 मानक निर्धारित किए गए हैं। इन अलग-अलग मानकों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिलों को उनके प्रदर्शन के हिसाब से अंक दिए जाते हैं। इस तरह से वर्ष 2025 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले टॉप-5 जिलों का चयन किया गया है। इसमें पूर्णिया, सारण, लखीसराय, कटिहार और शेखपुरा शामिल हैं।
इसके विपरित खराब प्रदर्शन करने वाले पांच जिलों में सहरसा, मधुबनी, जहानाबाद, नालंदा और नवगछिया शामिल हैं।
खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों को सभी निर्धारित मानकों में अपनी स्थिति को बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिलों को बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करके लागू करने के लिए कहा गया है। इसका मुख्य उदेश्य वर्ष 2030 तक राज्य में सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों की संख्या को आधी करना है। केंद्र सरकार के स्तर से निर्धारित मानकों के अनुसार, वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसदी तक कटौती करने का लक्ष्य रखा गया है।
ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय के ट्रैफिक प्रभाग के स्तर से पहली बार रैंकिंग की यह पहल की गई है। इससे जिलों को अपनी स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी।राज्य के सभी जिलों को ट्रैफिक नियमों और कायदों से जुड़े 10 मानकों पर परखते हुए उनका मूल्यांकन किया गया है और इसके आधार पर रैंकिंग की गई है। इन मानकों के लिए अलग-अलग अंक भी निर्धारित किए गए हैं। इस तरह कुल 100 में जितने अंक जिस जिले को मिले, उनकी रैंकिंग उसके आधार पर तय की गई।
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