नयी दिल्ली , अगस्त 28 -- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2030 तक भारत को मलेरिया-मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में प्रगति की शुक्रवार को उच्चस्तरीय समीक्षा की।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक एवं स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव आराधना पटनायक की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसी), राज्यों के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशकों और संबंधित जिलाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 33 अत्यधिक प्रभावित जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन जिलों में वर्ष 2025 में देश के कुल मलेरिया मामलों के 64 प्रतिशत और मौतों के 54 प्रतिशत मामले दर्ज किये गये थे।

उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्ष 2015 से 2025 के बीच देश में मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आयी है। इसी अवधि में अत्यधिक प्रभावित जिलों की संख्या 155 से घटकर 33 रह गयी। वर्ष 2022 से 2025 के दौरान 160 जिलों ने शून्य स्थानीय मलेरिया मामलों की सूचना दी। बैठक में मिजोरम, ओडिशा, त्रिपुरा, असम, आंध्र प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र की स्थिति की राज्यवार समीक्षा की गयी।

श्रीमती पटनायक ने कहा कि 2030 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च स्तर की सतर्कता के साथ क्षेत्र-विशेष और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रणनीतियां लागू करना जरूरी है।

समीक्षा के दौरान शुरुआती पहचान और मरीजों को पूरा उपचार उपलब्ध कराने के साथ 'जांच, उपचार और निगरानी' रणनीति को मजबूत करने पर जोर दिया गया। निदान और उपचार में देरी को मलेरिया से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया। राज्यों को सक्रिय निगरानी बढ़ाने तथा विशेष रूप से दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में जांच किट और मलेरिया-रोधी दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये।

श्रीमती पटनायक ने कहा कि मलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ अन्य क्षेत्रों का समन्वय भी आवश्यक है। जलभराव रोकने, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और पर्यावरण प्रबंधन के लिए ग्रामीण विकास, शहरी विकास विभागों तथा पंचायती राज संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया। बुखार के मामलों की तत्काल सूचना देने, जलभराव और मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करने तथा उनके उन्मूलन में स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक स्वयंसेवकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने की सलाह दी गयी।

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