चेन्नई , अप्रैल 16 -- भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट (इसार-2025) के अनुसार वर्ष 2025 में विश्व भर में अब तक के सबसे अधिक रॉकेट प्रक्षेपित किये गये।
इस रिपोर्ट को इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने कुछ दिन पहले बेंगलुरु में आयोजित 'स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस' (स्मॉप्स-2026) के उद्घाटन सत्र के दौरान जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में कुल 328 रॉकेट प्रक्षेपित किये गये, जिनमें से 315 सफल रहे। इन मिशनों के जरिए 4,198 उपग्रहों को उनकी कक्षाओं में स्थापित किया गया।
इस वर्ष अंतरिक्ष में मानव निर्मित वस्तुओं की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई और कुल 4,651 नई वस्तुएं अंतरिक्ष में भेजी गयीं। इसरो ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में यह एक बड़ी वृद्धि है, क्योंकि 2024 में 254 प्रक्षेपणों के माध्यम से 2,963 वस्तुएं और 2023 में 212 प्रक्षेपणों के माध्यम से 3,135 वस्तुएं अंतरिक्ष में भेजी गयी थीं।
भारत की तरफ से 2025 के अंत तक निजी संचालकों और शैक्षणिक संस्थानों सहित कुल 144 अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किये गये। वर्तमान में भारत के पास निचली कक्षा (एलईओ) में 22 और भू-स्थैतिक कक्षा (जीईओ) में 31 सक्रिय उपग्रह हैं। वहीं, एनवीएस-02 उपग्रह एक अंडाकार कक्षा में अपना काम कर रहा है।
इसके अलावा, भारत के दो दूरस्थ अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-2 और आदित्य-एल1 भी पूरी तरह सक्रिय हैं। साल 2025 की एक खास घटना चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल का चंद्रमा के पास से गुजरना रहा। यह मॉड्यूल नवंबर 2023 में पृथ्वी की ऊंची कक्षा में भेजा गया था, जिसने नवंबर 2025 में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में फिर से प्रवेश किया। वर्ष 2025 में श्रीहरिकोटा से पांच बड़े प्रक्षेपण किए गए, जिनमें जीएसएलवी-एफ15, पीएसएलवी-सी61, जीएसएलवी-एफ16 (निसार), एलवीएम3-एम5 और एलवीएम3-एम6 शामिल थे।पीएसएलवी-सी61 को छोड़कर बाकी सभी मिशन सफल रहे। पीएसएलवी-सी61 के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आने के कारण ईओएस-9 उपग्रह अपनी कक्षा में स्थापित नहीं हो सका।
जीएसएलवी-एफ15 मिशन भारत के लिए ऐतिहासिक रहा क्योंकि यह श्रीहरिकोटा से भारतीय रॉकेट का 100वां प्रक्षेपण था। हालांकि, सटीक प्रक्षेपण के बावजूद प्रोपल्शन सिस्टम में खराबी के कारण एनवीएस-02 उपग्रह अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुँच सका।
नासा और इसरो का संयुक्त मिशन 'निसार' 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। इसी तरह जीसैट-7आर को भी उसकी सही जगह पर स्थापित किया गया। कुल मिलाकर, भारतीय रॉकेटों ने इस साल दो भारतीय और एक विदेशी उपग्रह को उनकी कक्षा में पहुँचाया। इसके अलावा अमेरिका से भी कुछ भारतीय उपग्रह प्रक्षेपित किए गए, जिससे इस साल कुल आठ भारतीय उपग्रह अंतरिक्ष में पहुँचे।
इसरो के उपग्रहों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष कमान (यूएसस्पेसकॉम) द्वारा जारी 1.5 लाख से अधिक अलर्ट का विश्लेषण किया गया। उपग्रहों को आपस में टकराने से बचाने के लिए भू-स्थैतिक कक्षा में चार और निचली कक्षा में 14 बार उनकी दिशा बदलने (मैन्यूवर) के कदम उठाए गए।
दूरस्थ अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी इसी तरह की सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई गई। चंद्रयान-2 की सुरक्षा के लिए 16 बार सुधार किए गए और दो मौकों पर टकराव टालने के लिए पहले से तय योजनाओं में बदलाव किया गया सभी सक्रिय उपग्रहों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालमेल बिठाया गया। चंद्रयान-2 के मामले में नासा ने अन्य निजी कंपनियों के साथ समन्वय करने में मदद की।
वर्ष 2025 में कुल 12 भारतीय वस्तुएं अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में लौटीं। इसमें पीएसएलवी-सी3 के मलबे के आठ टुकड़े भी शामिल थे, जबकि इसके 33 टुकड़े अब भी अंतरिक्ष में मौजूद हैं।
वैश्विक स्तर पर 2025 की एक और बड़ी उपलब्धि 'स्पैडेक्स' मिशन रहा। इसमें अंतरिक्ष में दो यानों को खुद से जोड़ने और अलग करने की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया गया। यह भविष्य में उपग्रहों की मरम्मत और अंतरिक्ष मलबे को हटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वर्ष 2025 भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक यात्रा के लिए भी याद किया जाएगा। उन्होंने 'एक्जियोम-4' मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की कमान संभाली और 15 जुलाई को सफलतापूर्वक धरती पर वापस लौटे।
रिपोर्ट में अंतरिक्ष को साफ रखने के प्रयासों पर भी जोर दिया गया है। इसरो ने 2030 तक 'मलबे मुक्त अंतरिक्ष मिशन' (डीएफएसएम) का लक्ष्य रखा है। इसके तहत अब उपग्रहों के डिजाइन और संचालन में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं जिससे मिशन खत्म होने के बाद वे अंतरिक्ष में कचरा न बनें।
इसरो लद्दाख के हानले में एक विशेष टेलीस्कोप और उत्तर-पूर्वी भारत में एक स्वदेशी रडार सिस्टम स्थापित कर रहा है ताकि अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं पर नजर रखी जा सके। श्रीहरिकोटा में मौजूद रडार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित