लखनऊ , मई 08 -- वरिष्ठ वामपंथी नेता, महिला अधिकार कार्यकर्ता और शिक्षिका आशा मिश्रा का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह 79 वर्ष की थीं। परिवार के अनुसार उन्होंने सुबह लगभग 10:55 बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले वर्ष जून से अस्वस्थ चल रही थीं।
आशा मिश्रा छात्र जीवन से ही कानपुर में वामपंथी आंदोलन से जुड़ी रहीं। उन्होंने लंबे समय तक महिलाओं के अधिकार, सामाजिक न्याय और जन मुद्दों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई। राजधानी लखनऊ में विभिन्न महिला संगठनों के साथ जुड़कर उन्होंने महिला उत्पीड़न और सामाजिक मुद्दों पर कई आंदोलनों एवं प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की सदस्य रह चुकी थीं। इसके साथ ही वह पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की भी सदस्य थीं।
आशा मिश्रा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय महिला फेडरेशन से की थी। संगठन में उन्होंने राष्ट्रीय सचिव मंडल की उपाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। शिक्षक आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वह माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) की प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहीं। उनके परिवार में दो पुत्र हैं। बड़े पुत्र प्रांशु मिश्रा लखनऊ में हिंदुस्तान टाइम्स के रेजिडेंट एडिटर हैं, जबकि छोटे पुत्र पुणे में रहते हैं।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी तथा नोएडा से भाजपा विधायक पंकज सिंह ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सीपीआई के प्रदेश सचिव अरविंद स्वरूप ने भी आशा मिश्रा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन जन आंदोलनों, महिला अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए समर्पित किया।
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