रायपुर , अक्टूबर 08 -- छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने गुरुवार को कांकेर में आयोजित राज्य स्तरीय वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में रेडियो कॉलरिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी एवं मोबाइल चेतावनी प्रणाली के लिए 60 लाख रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने और वन्यप्राणियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
वन मंत्री ने वन्यप्राणियों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित वाहन उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।
श्री कश्यप ने बताया कि प्रदेश में भालू और तेंदुओं की गतिविधियों तथा उनके विचरण क्षेत्रों की निगरानी के लिए 40 लाख रुपये की लागत से रेडियो कॉलरिंग परियोजना शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त 20 लाख रुपये की लागत से एआई आधारित निगरानी एवं मोबाइल चेतावनी प्रणाली विकसित की जाएगी। इस व्यवस्था के माध्यम से वन्यप्राणियों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही संभावित खतरे की जानकारी ग्रामीणों तक मोबाइल के जरिए पहुंचाई जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने तथा जैव-विविधता के संरक्षण के लिए जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया।
समारोह के दौरान वन मंत्री ने वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता और प्राकृतिक विरासत पर आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य की जैव-विविधता पर केंद्रित 'गोमर्डा : द हिडन एमराल्ड ऑफ छत्तीसगढ़', बाघिन के दृष्टिकोण से जंगल के अनुभवों को प्रस्तुत करने वाली 'अचानकमार की जीती-जागती कहानी झुमरी की जुबानी' तथा गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य के प्राचीन शैलचित्रों और पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित 'टाइमलेस इम्प्रिंट्स : गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व' शामिल हैं।
इस अवसर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन और वन्यप्राणी संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
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