भोपाल , फरवरी 12 -- वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण सत्रों की शुरुआत की गई है। प्रथम चरण में 21 जिला मुख्यालयों पर उपखंड स्तरीय वन अधिकार समितियों के शासकीय एवं अशासकीय सदस्यों सहित जिला स्तर पर नामांकित मास्टर ट्रेनर्स के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रदेश में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के लिए 26 हजार से अधिक गांवों को चिन्हित किया गया है। इन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पिछले वर्ष से अभियान संचालित किया जा रहा है, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में चल रहा है। उपखंड स्तरीय समितियों को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के साथ विशेष रूप से सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जनजातीय कार्य विभाग ने विशेष पहल करते हुए टास्क फोर्स के विशेषज्ञों की सहायता से राज्य स्तर पर 35 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स की टीम तैयार की है। यह टीम अनुसूचित क्षेत्र के 20 जिलों की उपखंड स्तरीय समितियों के 828 सदस्यों को प्रशिक्षित करेगी। साथ ही जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का भी प्रशिक्षण किया जा रहा है, जो ग्राम स्तर की वन अधिकार समितियों को प्रशिक्षित करेंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्थान अभियान' के अंतर्गत संचालित किए जा रहे हैं।
जनजातीय कार्य विभाग द्वारा समितियों के शासकीय सदस्यों, जिनमें अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अनुविभागीय अधिकारी (वन), जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं समिति में नामांकित जनपद पंचायत सदस्य शामिल हैं, को सामुदायिक वन संसाधन दावों की तैयारी, निराकरण और मान्यता प्रदान करने की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत मान्य वन अधिकारों में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों का विशेष महत्व है। यह ग्राम सभाओं को अपने जंगलों के संरक्षण और प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है तथा अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन प्रबंधन में प्रमुख भूमिका देता है।
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