भोपाल , जुलाई 30 -- मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वन अधिकार अधिनियम-2006 जनजातीय कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है और इससे जुड़े सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।

राज्यपाल श्री पटेल ने आज यहां लोकभवन में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक में कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा जिम्मेदार नागरिकों का सहयोग भी लिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम सभाओं की समुचित प्रक्रिया अपनाई जाए तथा सभी कार्य सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों।

उन्होंने सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों, संरक्षण एवं प्रबंधन की जिलेवार समीक्षा करते हुए पेसा ग्रामों में अधिनियम की प्रगति की जानकारी ली। राज्यपाल ने ग्राम सभाओं के कार्यों और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने तथा समय-समय पर संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कराने पर भी जोर दिया।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि 15 अगस्त को आयोजित विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से वन संसाधन अधिकारों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे तथा संबंधित सभी विभागों का सहयोग लिया जाएगा।

प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा ने प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की प्रगति और विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी। प्रमुख सचिव वन श्री राघवेंद्र सिंह ने लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने का भरोसा दिलाया।

बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दीपक खांडेकर, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव श्री ई. रमेश कुमार, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्री शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री मनोज कुमार अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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