सवाई माधोपुर , जून 26 -- कंजर्वेशन ईकोलॉजिस्ट, लेखिका और फोटोग्राफर डॉ. लतिका नाथ ने शुक्रवार को कहा कि वन्यजीव पर्यटन और संरक्षण में संतुलन की जरुरत है तथा इस मामले में नेपाल, भूटान, अफ्रीकी महाद्वीप के देशों और दक्षिणी अमरीका से सीख लेनी चाहिए।

डॉ नाथ ने बाघ संरक्षण और संवर्धन के समाधान खोजने एवं इसे प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सवाईमाधोपुर जिले के रणथंभौर में आयोजित तीन दिवसीय पांचवें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक (आईटीडब्ल्यू) में यह बात कही। उन्होंने भारत के बाघों का भविष्य: संकट, रिकवरी और लंबे समय तक अस्तित्व' विषय पर कहा कि संरक्षण और वन्यजीव पर्यटन की बात की जाती रही है लेकिन इन प्रोजेक्ट्स की निगरानी करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाघ पर्यावरण के साथ साथ इंसानों का भी दोस्त होता है। उन्होंने नियोजित विकास पर जोर देते हुए कहा कि नुकसान के बाद कदम उठाने से कोई फायदा नहीं है।

डॉ. अनिश अंधेरिया ने कहा कि ईकोनॉमी के लिए पर्यावरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की संरचनाएं (ब्रिज, हाईवे, रेलवे लाइन) से जानवरों का जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने रेलवे लाइन्स पर सायरन लगाने एवं वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने के तरीके बताये। उन्होंने यह भी कहा कि टाइगर से देश की जल विज्ञान भी बचेगी।

लिव4फ्रीडम एलएलपी द्वारा रणथंभौर के आमाघाटी वाइल्डलाइफ रिज़ॉर्ट और कैसल झूमर बावड़ी में सर्वश्रेष्ठ बाघों का संरक्षण (कंजर्व इंडियाज़ फाइनेस्ट टाइगर्स) थीम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में पहले दिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया और सुबह झूमर बावड़ी में स्कूली बच्चों ने पेंटिंग्स में वन्यजीव एवं बाघ संरक्षण के संदेश को साकार किया।

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