नैनीताल , अप्रैल 14 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के तहत ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर में रह रहे वनवासियों के मामले में गुरूवार को महत्वपूर्ण निर्णय जारी करते हुए कहा कि वनाधिकार के दावे निस्तारित किये बिना वनवासियों को वहां से हटाया नहीं जाये।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बाजपुर के जुड़का में रह रहे सुमन, संतोष, रोशनी, जीत सिंह समेत सात वनवासियों की याचिका पर आज सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिये।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वह वर्षों से जुड़का वनग्राम में रह रहे हैं। आजीविका चलाने के लिये वह खेती और पशुपालन का काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। यही नहीं उन्हें खेती करने से भी रोका जा रहा है।

आगे कहा कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। यही नहीं उनके वनाधिकार के दावे लंबित हैं और बिना उनके वनाधिकार के दावे सुने बिना उन्हें हटाया जा रहा है। संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) की ओर से अपने जवाब में कहा गया कि अभी तक वनाधिकार के दावे की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने बताया कि अदालत ने अंत में वनवासियों की बेदखली पर रोक लगाते हुए निर्देश दिये कि जब तक सक्षम समिति वनाधिकार के दावे पर सुनवाई नहीं कर लेेती तब तक उन्हें हटाया नहीं जायेगा और उन्हें खेती करने से भी नहीं रोका जायेगा।

अदालत ने अपने आदेश में वनाधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि नैनीताल जिला विधिक सेवा प्राकिधरण की ओर से दायर जनहित याचिका के जवाब में वनवासियों के मामले में पहले से दिये गये आदेशों का अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाये।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित