मंगलुरु , अगस्त 16 -- कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी पर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ उरवा थाना में शिकायत दर्ज कराई।
यह शिकायत स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के एक वीडियो के वायरल होने के बाद दर्ज कराई गई, जिसमें श्रीमती सोनिया गांधी को वंदे मातरम के पूरे गायन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर इशारा करते और उनसे बात करते हुए देखा गया था। भाजपा नेताओं ने इन इशारों को गायन पर आपत्ति जताने या उसमें बाधा डालने की कोशिश के तौर पर देखा और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिससे यह घटना भाजपा और कांग्रेस के बीच एक नया राजनीतिक विवाद बन गई।
भाजपा ने राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया है कि सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का भी उतना ही सम्मान किया जाना चाहिए जितना राष्ट्रगान का। यह विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व पर वंदे मातरम के पूरे संस्करण से लंबे समय से समस्या होने का आरोप लगाया। पार्टी ने इस ताजा घटना को कांग्रेस के उस ऐतिहासिक फैसले से जोड़ा है जिसमें राष्ट्रीय समारोहों में गीत के केवल पहले दो छंदों को ही गाने तक सीमित कर दिया गया था।
कांग्रेस ने ताजा वीडियो के बारे में भाजपा के नजरिए को खारिज कर दिया है। पार्टी के अनुसार श्रीमती सोनिया गांधी वंदे मातरम् पर आपत्ति नहीं जता रही थीं बल्कि कार्यक्रम के दौरान श्री खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने के बारे में उनसे बात कर रही थीं। इस विवाद पर व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है, जिसमें भाजपा नेताओं ने श्रीमती गांधी से माफी की मांग करते हुए जोर दिया है कि वंदे मातरम् की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व को कम नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में गीत के शुरुआती दो पद गाने का फैसला अकेले जवाहरलाल नेहरू का नहीं था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला आजादी की लड़ाई के कई बड़े नेताओं की सामूहिक सहमति से लिया गया था।
इसलिए ताजा शिकायत सिर्फ कैमरे में कैद हुए एक पल तक ही सीमित नहीं है। इसने 'वंदे मातरम्' के इतिहास, उसे गाने के तरीके और उसके राजनीतिक अर्थ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच पुरानी लड़ाई को फिर से छेड़ दिया है। एक बार फिर यह राष्ट्रीय गीत राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और आजादी की लड़ाई की विरासत को लेकर टकराव का मुद्दा बन गया है।
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