नैनीताल , अगस्त 12 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की ओर से उच्च न्यायालय परिसर नैनीताल में बुधवार को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) समेत अन्य लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर उच्चस्तरीय प्री-मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में आपसी समझौते के माध्यम से मामलों के निस्तारण और वादकारियों को शीघ्र मुआवजा दिलाने की रूपरेखा तैयार की गई।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने बैठक की अध्यक्षता की। इसमें विभिन्न बीमा कंपनियों के राज्य प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में लंबित एमएसीटी मामलों के साथ-साथ दीवानी, पारिवारिक विवाद, श्रम मामले, बैंक रिकवरी और शमनीय आपराधिक मामलों को भी लोक अदालत के माध्यम से निपटाने पर जोर दिया गया।

विधिक सेवा समिति की सचिव नेहा कुशवाहा ने आम जनता और वादकारियों से अपील की कि वे उच्च न्यायालय में लंबित एमएसीटी मामलों के अलावा उन अन्य मामलों की भी पहचान करें, जिनमें कानून के अनुसार राजीनामा या विधिक समझौता संभव है। उन्होंने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते का विकल्प चुनने का आह्वान किया।

बैठक में बताया गया कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निस्तारण से लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलने के साथ समय और धन की बचत होती है। दोनों पक्षों की सहमति से निर्णय होने के कारण भविष्य में विवाद की संभावना भी कम रहती है और लोक अदालत में मामला सुलझने पर कोर्ट फीस की वापसी का भी प्रावधान है।

बैठक के अंत में न्यायमूर्तिगण ने निर्देश दिए कि पक्षकार केवल एमएसीटी मामलों तक सीमित न रहें, बल्कि पारिवारिक विवाद, श्रम मामले, बैंक रिकवरी और शमनीय आपराधिक मामलों में भी लोक अदालत के जरिए समझौते की संभावनाएं तलाशें। सभी पक्षकारों से पुराने लंबित मामलों की पहचान कर उनके निस्तारण के लिए समयबद्ध कदम उठाने को कहा गया।

बीमा कंपनियों और संबंधित संस्थाओं को भी वादकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। समिति ने सभी संबंधित पक्षों से न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए अधिक से अधिक मामलों को समझौते के आधार पर निस्तारित कराने में सहयोग की अपील की।

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