नैनीताल , अप्रैल 01 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में सरकार से एक सप्ताह के अंदर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले आठ अप्रैल को सुनवाई होगी।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

आज महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर उच्च न्यायालय में पेश हुए और उन्होंने खंडपीठ को बताया कि सर्च कमेटी की बैठक आगामी तीन अप्रैल को आहूत की गई है। कमेटी लोकायुक्त के संबंध में नाम पेश करेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।

खंडपीठ ने महाधिवक्ता की ओर से दी गई अंडरटेकिंग को नोट करते हुए निर्देश दिया कि एक सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करें। साथ ही अगली सुनवाई के लिए आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी।

आज याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार लगातार इस मामले को टालती आ रही है। कुछ समय पहले भी राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कमेटी का गठन कर लिया गया है। सरकार जल्द लोकायुक्त की नियुक्ति कर देगी।

दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य में लोकायुक्त का पद लंबे समय से रिक्त है। प्रदेश सरकार की ओर से लोकायुक्त कार्यालय पर हर साल दो से तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के लिए कोई स्वतंत्र जांच व्यवस्था नहीं है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि राज्य की सभी जांच एजेंसियां सरकार के अधीन हैं, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है। ऐसे में एक सशक्त और स्वायत्त लोकायुक्त की नियुक्ति को जरूरी बताया गया है।

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