बेंगलुरु , जनवरी 20 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन के तहत दक्षिणी राज्यों की सीटों में संभावित कटौती पर मंगलवार को गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि इससे देश के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक समानता को ठेस पहुंच सकती है।

श्री सिद्धारमैया ने यहां समाजवादी अध्ययन केंद्र और समाजवादी संगम द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया उन दक्षिणी राज्यों के लिये गंभीर खतरा है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है।

उन्होंने कहा, "दक्षिणी राज्यों ने देश के आह्वान पर जनसंख्या नियंत्रित की, शिक्षा में निवेश किया और महिलाओं को सशक्त बनाया। अब हमें बताया जा रहा है कि इस सफलता की सजा प्रतिनिधित्व में कटौती के रूप में मिलेगी।"श्री सिद्धारमैया ने दोहराया कि यदि परिसीमन नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया गया, तो कर्नाटक सहित दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें या तो घट सकती हैं या उनमें कोई वृद्धि नहीं होगी, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा।

उन्होंने याद दिलाया कि पहले के अनुमानों के अनुसार, अगर 2021 या 2031 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया, तो कर्नाटक की लोकसभा सीटें 28 से घटकर 26 हो सकती हैं। अविभाजित आंध्र प्रदेश की सीटें 42 से घटकर 34, केरल की 20 से 12 और तमिलनाडु की 39 से घटकर 31 हो सकती हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि या तो परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाया जाए या फिर लोकसभा सीटों की कुल संख्या का विस्तार इस तरह किया जाए, जिससे केवल जनसंख्या के आंकड़ों पर निर्भरता न रहे।

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