नयी दिल्ली , मार्च 27 -- लोकसभा में शुक्रवार को जीवन को सुगम बनाने और कारोबार करने की सुगमता वाला जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 को पुरः स्थापित किया गया। यह विधेयक संयुक्त संसदीय समित की सिफारिशों के बाद सदन के समक्ष पेश किया।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 को सदन में पेश करते हुए कहा इससे व्यापार और जीवन की सुगमता के लिए प्रावधान किये गये है। इसके तहत 79 केंद्रीय कानूनों के (23 मंत्रालयों से संबंधित) कुल 784 उपबंधों को संशोधित करने का प्रावधान है। छोटे और तकनीकी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, अदालतों का बोझ कम करने और इज आफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने का एक बड़ा प्रशासनिक सुधार है।
श्री प्रसाद ने कहा कि ऐसी बात बिल्कुल नहीं है कि सभी मामलों में जुर्माना देकर अपराधी छूट जाएगा। विपक्ष का यह आरोप निराधार है कि सभी पक्षों से बात नहीं किया गया है। छोटी मोटी गलतियों के लिए न्यायालय में जाकर न फंसे इसलिए जुर्माने का प्रावधान किया गया।
कांग्रस की डॉ. के काव्या ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा के उपाय जो पहले थे वह यथापूर्वक रहने चाहिए।
कांग्रेस के गोवाल कगदी पडवी ने कहा कि कारावास की जगह जुर्माने के भुगतान कर दिया गया है जो उचित नहीं है। प्रशासनिक रूप से इसमें कई कमियां हैं। संविधान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है और इससे संसद की शक्तियां कम हो जाएगी। इससे गरीबों को नुकसान है। कारावास को खत्म करना न्यायिक प्रक्रिया को खत्म करने जैसा होगा और इससे अपराधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और गरीबों को न्याय नहीं मिलेगा। इसे दोबारा समिति को वापस भेजा जाना चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसदीय समिति में सभी को अपनी बातों को रखने का मौका दिया गया है और इससे पहले दोबारा संसदीय समिति में भेजने का कोई उदाहरण नहीं है। विपक्ष का आरोप सिर्फ मेरिट पर है।
भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि जेपीसी में जो सिफारिशें आती है उसे बदला नहीं जाता है।
भाजपा के अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सदन के ध्यान में एक बात अवश्य आना चाहिए कि जब से मोदी सरकार बनी है 'इज ऑफ डूइंग' पर काम हुआ है। छोटी-छोटी गलतियों में जेल भेजने का जो प्रावधान था उसे खत्म किया गया इसलिए यह विधेयक लोगों को हित में है।
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