पटना , अप्रैल 14 -- बिहार की महिला उद्यमी अपने हाथों से बनाए उत्पादों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेट (जेम) पोर्टल पर रजिस्टर कर देशभर के केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, पंचायतों और सहकारी समितियों तक बेच रही है।
बिहार की महिलाएं सदियों से मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कढ़ाई, टिकुली आर्ट, सिक्की, जूट, बांस और घरेलू उत्पादों जैसी पारंपरिक कलाओं से जुड़ी हुई हैं। ये शिल्प मुख्य रूप से महिलाओं के स्तर से ही बनाए जाते हैं। अब इन्हें डिजिटल माध्यम से ग्लोबल बाजार मुहैया कराया जा रहा है।महिला उद्यमी अपने हाथों से बनाए उत्पादों को जेम पोर्टल पर रजिस्टर कर देशभर के केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, पंचायतों और सहकारी समितियों तक बेच रही है। इस प्रणाली से बिचौलिए पूरी तरह हट जाते हैं। लेन-देन पारदर्शी और डिजिटल होता है और इसके जरिए भुगतान भी समय पर मिलता है।
बिहार के 20 जिलों (जैसे- मधुबनी से मधुबनी पेंटिंग, सीतामढ़ी से सिक्की के उत्पाद, दरभंगा से मखाना, कटिहार से जूट उत्पाद, भागलपुर से सिल्क साड़ी, बांका से सिल्क सूट) से 31 अलग-अलग तरह के स्थानीय उत्पाद जेम पोर्टल पर उपलब्ध हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्द्योग मंत्रालय ने 2019 में जेम पोर्टल पर वुमनिया की पहल शुरू की। इसके माध्यम से महिलाओं को एक डिजिटल इंटरफेस दिया गया, जहां इनके माध्यम से निर्मित उत्पादों का सहज तरीके से पंजीकरण और सूचीकरण कराया गया।
इस पहल ने अपनी शुरुआत के बाद से उल्लेखनीय विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पर 2 लाख 10 हजार से अधिक महिला लघु व मध्यम उद्यम पंजीकृत हुए, जिनका कुल ऑर्डर वॉल्यूम 13.7 लाख रहा। इन उद्यमों को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अनुबंध दिए गए, जो वर्ष 2024-25 की तुलना में 27.60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।जेम के कुल ऑर्डर का 5.6 प्रतिशत हिस्सा महिला लघु एवं मध्यम उद्यमों को दिया गया, जो अनिवार्य तीन प्रतिशत खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।
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