मुंबई , जून 01 -- महाराष्ट्र सरकार द्वारा ई-केवाईसी आवश्यकताओं का अनुपालन न करने के कारण मुख्यमंत्री लाड़की बहन योजना से लगभग 80 लाख महिला लाभार्थियों को हटाने के फैसले की आज विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने आरोप लगाया कि यह कदम राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में श्री पाटिल ने दावा किया कि लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन के खराब प्रदर्शन के बाद राज्य विधानसभा चुनावों से पहले इस योजना को बड़े पैमाने पर शुरू किया गया था।
उन्होंने तर्क दिया कि इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को अयोग्य घोषित करना सरकार के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
श्री पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र गंभीर राजकोषीय घाटे का सामना कर रहा है, जो वैश्विक आर्थिक मंदी से और भी बदतर हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में विभिन्न आधारों पर और भी महिलाओं को इस योजना से बाहर किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार धीरे-धीरे इस कार्यक्रम को बंद कर देती है, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
उनके अनुसार, शुरुआत में बेहतर योजना बनाकर वर्तमान स्थिति को टाला जा सकता था। इस बीच, नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना ने अपना चुनावी उद्देश्य पूरा कर लिया है और चुनाव के बाद महिला लाभार्थियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया।
श्री वडेट्टीवार ने सत्ताधारी दल पर आरोप लगाया कि उसने योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता पर निर्भर महिलाओं की उपेक्षा की है।
इस मुद्दे से महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस तेज होने की आशंका है, क्योंकि विपक्ष सरकार से उसके प्रमुख कल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक से लाभार्थियोंको बड़े पैमाने पर बाहर किये जाने के बारे में जवाब मांग रहा है।
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