जयपुर , मई 30 -- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्षी राजनेताओं द्वारा लगातार अपनाई जा रही असंसदीय भाषा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध आचरण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राजनीति में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, विरोध भी होना चाहिए लेकिन विरोध और दुश्मनी के बीच की रेखा को लांघना लोकतंत्र के लिए घातक है।
श्री राठौड़ ने शनिवार को अपने बयान में कहा कि भाजपा विचारों का विरोध करती है, लेकिन हमारी राजनीतिक संस्कृति में शब्दों की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। विपक्ष का धर्म सरकार की कमियों को उजागर करना है, जनता के मुद्दों को उठाना है और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है, लेकिन व्यक्तिगत कटुता, अपमानजनक शब्दों और सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल या नेता को शोभा नहीं देता।
उन्होंने कहा कि आज राजनीति में सबसे बड़ी आवश्यकता संवाद, शालीनता और वैचारिक संघर्ष की है लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए समाज में टकराव और आवेश का वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। सांसद हनुमान बेनीवाल की भाषा और उनके सार्वजनिक वक्तव्यों में बार-बार इसी प्रवृत्ति की झलक दिखाई देती है।
श्री राठौड़ ने कुचामन प्रवास के दौरान श्री बेनीवाल के समर्थकों द्वारा उनके आगे किए गए प्रदर्शन पर कहा कि अचानक कुछ लोग हाथों में तख्तियां लेकर उनकी गाड़ी के समीप पहुंचे और आक्रामक व्यवहार करने लगे। स्थिति के मद्देनजर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वाहन से नीचे उतरने से रोक दिया।
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