जयपुर , जून 25 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन को पांच हजार रुपये बढ़ाकर 25 हजार रुपये तथा मासिक चिकित्सा सहायता को एक हजार रुपये बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने की घोषणा की हैं।

श्री शर्मा ने गुरुवार को राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम, दुर्गापुरा में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। प्रदेश में हमारी सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि को तत्काल प्रभाव से बहाल किया।

उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। संविधान की रक्षा में लोकतंत्र सेनानियों का अविस्मरणीय योगदान है। इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना तक बना दिया गया था।

उन्होंने देश में लोकतंत्र और संविधान की भावना की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे सभी इन विभूतियों के राष्ट्र के प्रति संघर्ष एवं समर्पण को आत्मसात करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष एवं समर्पण की मूल भावना के अनुरूप ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में लोकतंत्र एवं संविधान मजबूत बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाये हैं। प्रधानमंत्री ने संविधान दिवस मनाने की शुरुआत कर संविधान निर्माताओं का सम्मान किया। साथ ही संविधान के शिल्पी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर से जुड़े स्थानों को पंचतीर्थ बनाकर उन्हें सम्मान देने का काम किया।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना संभव हो सकी। समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लागू थी तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाये गये थे। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जबरन नसबंदी अभियान चलाया गया, जिससे आम जनता में भय और असंतोष का वातावरण उत्पन्न हुआ।

उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रहकर जनजागरण का कार्य जारी रखा। वर्ष 1977 के आम चुनाव में जनता ने आपातकाल के विरुद्ध अपना स्पष्ट जनादेश दिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हुई। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश सदैव स्मरण रखेगा।

सांसद एवं लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि आपातकाल की पृष्ठभूमि गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन और बिहार के छात्र-युवा आंदोलन से तैयार हुई थी, जिसका नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री के चुनाव को अवैध घोषित किए जाने के बाद लोकतांत्रिक संकट और गहरा गया था। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया तथा उन्होंने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए कार्य किया।

लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया।

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