वाराणसी , अप्रैल 12 -- प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लेखिका डा नीरजा माधव ने कहा है कि 'नारी शक्ति' केवल एक विचार नहीं, बल्कि शासन और लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति बनने जा रही है। वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की दिशा में 16, 17 और 18 अप्रैल को प्रस्तावित विशेष अधिवेशन को निर्णायक माना जा रहा है।
उन्होने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है, जिससे भारतीय राजनीति में एक नई क्रांति की शुरुआत होगी।
डॉ. माधव ने कहा कि आधी आबादी को पूरा अधिकार मिलेगा। भारतीय समाज में सदियों से कहा जाता रहा है कि "नारी समाज की आधारशिला है।" हमारे प्राचीन ग्रंथों और वैदिक परंपराओं में भी महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष स्थान दिया गया है। ऋषियों के साथ ऋषिकाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा है। बावजूद इसके, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी उनकी जनसंख्या के अनुपात में कभी नहीं रही। अब इस अधिनियम के लागू होने से वह असंतुलन दूर होने की उम्मीद है। आधी आबादी को शासन में समान भागीदारी मिलने से लोकतंत्र और अधिक प्रतिनिधिक तथा समावेशी बनेगा।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुकी हैं,चाहे वह प्रशासनिक सेवाएं हों, सशस्त्र बल हों, कॉरपोरेट जगत हो या लेखन और शिक्षा का क्षेत्र। लेकिन राजनीति में उनकी उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही है। इस कानून के लागू होने के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और वे नीतियों के निर्माण में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएंगी।
लेखिका ने यह सवाल भी स्वाभाविक बताया कि 2023 में कानून पारित होने के बावजूद इसे 2024 के चुनावों में लागू क्यों नहीं किया गया। इसका प्रमुख कारण परिसीमन और जनगणना से जुड़ी प्रक्रियाएं हैं, जो इस आरक्षण को लागू करने के लिए आवश्यक हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी चुनावों से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
हालांकि यह बदलाव ऐतिहासिक है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। ग्रामीण स्तर पर देखा गया है कि कई बार महिला प्रतिनिधि केवल नाममात्र की होती हैं और वास्तविक निर्णय उनके परिवार के पुरुष सदस्य लेते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और नेतृत्व कौशल से भी सशक्त करना होगा, ताकि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।
यह भी माना जा रहा है कि यदि वैश्विक राजनीति में महिलाओं की संख्या बढ़ती है, तो निर्णयों में संवेदनशीलता, करुणा और संतुलन बढ़ेगा। भारतीय संस्कृति में नारी को ममता, दया और सृजन की प्रतीक माना गया है। ऐसे में जब ये गुण शासन में आएंगे, तो समाज और विश्व दोनों में सकारात्मक बदलाव संभव है।
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