नैनीताल , जुलाई 08 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत लैब टेक्निशियनों को समान कार्य के आधार पर वेतनमान वृद्धि का लाभ देने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने कुसुम रावत एवं अन्य सहित कुल आठ रिट याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं को 15 अप्रैल 2010 से 9,300-34,800 रुपये (ग्रेड पे 4,200 रुपये) का वेतनमान दे। यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने के दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। अदालत ने इस मामले में सोमवार (छह जुलाई) को सुनवाई की थी, लेकिन आदेश की प्रति बुधवार को मिल सकी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में लैब टेक्निशियन के पद पर हुई थी। पांचवें वेतन आयोग के बाद उनका वेतनमान 4500-7000 रुपये तथा छठे वेतन आयोग के बाद 5200-20200 रुपये (ग्रेड पे 2800 रुपये) निर्धारित किया गया, जबकि उसी विभाग में कार्यरत एक्स-रे टेक्निशियन और डेंटल हाइजिनिस्ट का वेतनमान क्रमशः 15 अप्रैल 2010 और एक सितंबर 2010 से बढ़ाकर 9300-34800 रुपये (ग्रेड पे 4200 रुपये) कर दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को यह लाभ नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ऐसे ही मामले में पवन कश्यप एवं अन्य तथा बाद में माधव प्रसाद डोभाल एवं अन्य के मामलों में उच्च न्यायालय पहले ही समान राहत दे चुका है। राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि वर्तमान विवाद पूर्व के निर्णयों से जुड़ा हुआ है, हालांकि उसने यह भी बताया कि माधव प्रसाद डोभाल मामले में खंडपीठ के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के माध्यम से चुनौती दी गयी है।
न्यायालय ने कहा कि केवल एसएलपी दाखिल होने मात्र से पूर्व में दिये गये निर्णयों का प्रभाव समाप्त नहीं हो जाता। जब तक कोई स्थगन आदेश नहीं हो, तब तक समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को समान लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने सभी रिट याचिकाएं स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 15 अप्रैल 2010 से 9,300-34,800 रुपये (ग्रेड पे 4,200 रुपये) के वेतनमान वृद्धि का लाभ प्रदान किया जाये तथा आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के बाद दो माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए।
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