कोटा , नवंबर 01 -- राजस्थान के कोटा में राष्ट्रीय मेला दशहरा के तहत रविवार शाम को विजयश्री रंगमंच पर एक अनोखा और विहंगम लेजर एवं साउंड शो आयोजित किया गया। रंग-बिरंगी झिलमिलाती रोशनी और कर्णप्रिय संगीत की धुनों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भक्तिमय माहौल में दुर्गा चालीसा के पाठ से हुई। 'जय जय महिषासुर मर्दिनी' के दिव्य भजनों और धुनों के साथ लेजर किरणों के अनूठे मेल ने रंगमंच को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया। गीतों की धुनों पर थिरकती और रोशनी बिखेरती लेजर किरणों के प्रदर्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया, जिससे पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
शो के माध्यम से कोटा के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति, परंपरा और विरासत की गाथा को आधुनिक लेजर तकनीक द्वारा जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। लेजर शो के जरिए दर्शकों को बताया गया कि कोटा के प्रसिद्ध दशहरा मेले की शुरुआत 18वीं शताब्दी में महाराव दुर्जनशाल हाड़ा के शासनकाल में हुई थी।
तत्पश्चात, महाराव उम्मेद सिंह के शासनकाल में इस मेले ने एक विशाल जनउत्सव का स्वरूप धारण किया। बाद में, वर्ष 1921 में कोटा में नगरपालिका की स्थापना के साथ ही इस ऐतिहासिक दशहरा मेले को व्यापक और आधुनिक विस्तार दिया गया।
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