मऊ , जुलाई 22 -- उत्तर प्रदेश में मऊ जिले की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) की अदालत ने वर्ष 2019 के चर्चित लेखपाल हत्याकांड में चार दोषियों को हत्या और हत्या की साजिश का दोषी ठहराते हुए दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर कुल 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन के अनुसार, फरवरी 2019 में शहर कोतवाली क्षेत्र के ब्रह्मस्थान इलाके में सदर तहसील में तैनात लेखपाल धीरज सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतक की पत्नी रीता सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की थी।

इस मामले में कुल सात आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में सुनवाई हुई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने जगरनाथ, विनोद कुमार, मनोज राम तथा हरिभवन यादव उर्फ छन्नू यादव को बलवा, हत्या और हत्या के षड्यंत्र का दोषी करार दिया।

न्यायालय ने हत्या के अपराध में चारों दोषियों को आजीवन कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये अर्थदंड, जबकि हत्या के षड्यंत्र के अपराध में आजीवन कारावास एवं 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त बलवा के अपराध में दो-दो वर्ष के कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड और घातक आयुध से लैस होकर बलवा करने के अपराध में तीन-तीन वर्ष के कारावास के साथ पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।

अदालत ने आदेश दिया कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करते हैं तो उन्हें छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही जमा की गई अर्थदंड राशि का आधा हिस्सा वादिनी रीता सिंह को प्रदान किया जाएगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुकदमे के दौरान गवाहों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने में आरक्षी आशीष कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहायता मिली।

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