लखनऊ , जून 20 -- उत्तर प्रदेश में मानसून का इंतजार लंबा होता दिख रहा है। मौसम विभाग ने शनिवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में अगले पांच दिनों तक उष्ण लहर (लू) चलने की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं और 24 जून तक व्यापक वर्षा की संभावना नहीं है।
मौसम केंद्र द्वारा शनिवार को जारी प्रभाव आधारित पूर्वानुमान एवं चेतावनी के अनुसार 20 जून को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा अथवा बौछारें पड़ सकती हैं, लेकिन 21 से 24 जून तक प्रदेश के दोनों हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।
विभाग ने कहा है कि 20 से 24 जून के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लू चलने की संभावना बनी रहेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए किसी विशेष मौसम चेतावनी की आवश्यकता नहीं बताई गई है, जबकि पूर्वी क्षेत्र के लिए लगातार सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार 20 जून को बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या तथा अंबेडकरनगर समेत आसपास के क्षेत्रों में लू का प्रभाव देखने को मिल सकता है। 21 और 22 जून को लू प्रभावित जिलों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इस दौरान लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, हरदोई, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर सहित पूर्वी एवं मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी उष्ण लहर का असर रहने का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खेतों में काम करने वाले किसानों, निर्माण श्रमिकों और खुले में लंबे समय तक कार्य करने वाले लोगों में निर्जलीकरण तथा लू लगने का खतरा बढ़ सकता है।
विभाग ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचने, हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनने, पर्याप्त मात्रा में पानी एवं तरल पदार्थों का सेवन करने तथा ओआरएस, नींबू पानी, छाछ और लस्सी जैसे पेय पदार्थों का उपयोग करने की सलाह दी है।
कृषि क्षेत्र के लिए जारी परामर्श में कहा गया है कि लू का असर गन्ना, मक्का, मूंग, मूंगफली, सूरजमुखी, धान की नर्सरी तथा विभिन्न सब्जी फसलों पर पड़ सकता है। किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की एवं बार-बार सिंचाई करने, मल्चिंग अपनाने तथा फसलों को गर्मी के तनाव से बचाने की सलाह दी गई है। आम, केला और पपीता जैसी बागवानी फसलों के लिए भी नियमित सिंचाई और नमी संरक्षण के उपाय करने को कहा गया है।
मौसम विभाग ने पशुपालकों को भी दोपहर के समय पशुओं को खुले में चराने से बचाने तथा उन्हें पर्याप्त पानी और छाया उपलब्ध कराने की सलाह दी है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित