नयी दिल्ली , अक्टूबर 26 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने सोमवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला द सिल्वा को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी।

उन्होंने इस चुनावी नतीजे को ऐतिहासिक चौथा राष्ट्रपति कार्यकाल और दुनिया भर में श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय एवं जन कल्याण के लिए संघर्षरत लोकतांत्रिक और प्रगतिशील आंदोलनों के लिए प्रोत्साहन का स्रोत बताया।

'एक्स' पर जारी पोस्ट में श्री बेबी ने श्री लूला और ब्राजील की जनता को बधाई दी, साथ ही 'वर्कर्स पार्टी', 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ब्राजील' और उनकी जीत के लिए अभियान चलाने वाली अन्य प्रगतिशील व लोकतांत्रिक ताकतों को सलाम किया।

श्री बेबी ने कहा, "आपके शानदार चुनाव अभियान ने दुनिया को दिखा दिया है कि जब जनता एकजुट होती है तो नफरत और विभाजन की राजनीति को हराया जा सकता है।" उन्होंने ब्राजील के चुनावी जनादेश को राजनीतिक ध्रुवीकरण और विभाजनकारी अभियानों का सामना कर रही लोकतांत्रिक ताकतों के लिए एक बड़ा संदेश बताया।

माकपा महासचिव ने कहा कि यह जीत लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने, सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को बनाए रखने और जन कल्याण को मजबूत करने वाले आंदोलनों को प्रेरित करेगी। उन्होंने विशेष रूप से ब्राजील के लोकतांत्रिक संघर्ष में युवाओं की भूमिका का जिक्र कर कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रदर्शनों में उनकी भागीदारी भारत की युवा पीढ़ी को भी ऊर्जा दे सकती है।

दोनों देशों के लोकतांत्रिक आंदोलनों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, " लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने वाले युवाओं का यह जज्बा भारत में वही लड़ाई लड़ रहे हमारे अपने युवाओं में नया जोश भरेगा।"ब्राजील की राजनीतिक संप्रभुता पर जोर देते हुए श्री बेबी ने कहा, " जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। ब्राजील किसी का पिछलग्गू नहीं है।"उन्होंने कहा कि यह जनादेश न केवल राजनीतिक नेतृत्व की निरंतरता का प्रतीक है, बल्कि बाहरी हस्तक्षेप के बिना अपने देश की दिशा खुद तय करने के जनता के अधिकार का उद्घोष भी है।

श्री बेबी का यह संदेश वामपंथी और प्रगतिशील ताकतों के बीच अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पर माकपा के दीर्घकालिक रुख को दर्शाता है, विशेष रूप से उन ताकतों के बीच जो श्रमिकों के अधिकारों, आर्थिक समानता, सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी की वकालत करती हैं।

श्री लूला की सफलता को भारत के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर उन्होंने इस नतीजे को नफरत, विभाजन और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमलों का मुकाबला करने वाले आंदोलनों के लिए एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में प्रस्तुत किया।

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