जालंधर , अगस्त 13 -- पंजाब के जालंधर से लापता नाबालिग लड़के सतिंदर कुमार का मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पहुंच गया है। परिवार की ओर से स्थानीय पुलिस के समक्ष बार-बार प्रयास किये जाने के बावजूद बच्चे का पता नहीं चलने के आरोपों के बाद यूथ कांग्रेस जालंधर (शहरी) के जिला अध्यक्ष अंगद दत्ता ने परिवार की मदद की और मामला उच्च न्यायालय में ले जाने के लिए चंडीगढ़ की कानूनी टीम से संपर्क कराया।

उच्च न्यायालय में दायर याचिका के अनुसार, बच्चा 30 जून 2026 को लापता हुआ था। उसकी मां मंजू देवी ने जालंधर कैंट थाने के परागपुर पुलिस चौकी में शिकायत की थी, जिसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 127(6) के तहत एफआईआर संख्या 111, दिनांक 30 जून 2026 दर्ज की गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी परिवार पुलिस अधिकारियों के पास बार-बार जाता रहा, लेकिन बच्चे का पता लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अंगद दत्ता ने गुरुवार को बताया कि परिवार ने शुरुआत में पुलिस थाने में शिकायत लेकर संपर्क किया था। इस दौरान यूथ कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह भिंदा ने भी परिवार की सहायता की, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी परिवार करीब एक महीने तक पुलिस थाने के चक्कर लगाता रहा और नाबालिग को तलाशने के लिए कार्रवाई की मांग करता रहा। इसके बाद परिवार ने अंगद दत्ता से संपर्क किया। उन्होंने मामले को चंडीगढ़ स्थित मान लॉ फर्म के साथ उठाया।

अधिवक्ता दिलराज मान और अधिवक्ता प्रभसिमरन मान ने परिवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख करने की सलाह दी, ताकि जांच को प्रभावी, त्वरित और उचित निगरानी में कराया जा सके। याचिका में प्रभावी और शीघ्र जांच के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा वैकल्पिक रूप से पुलिस आयुक्त के समक्ष परिवार के प्रतिनिधित्व पर विचार करने की मांग की गई। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का अनुरोध भी किया गया।

अंगद दत्ता ने कहा कि परिवार के बार-बार पुलिस के पास जाने के बाद जब मामला उनके संज्ञान में आया तो यह उनके लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक लापता बच्चे और उसके परिवार की पीड़ा का मामला था। उन्होंने कहा कि मां को कई सप्ताह तक पुलिस थानों के चक्कर लगाकर यह नहीं सोचना चाहिए कि उसके बच्चे को तलाशने के लिए गंभीर प्रयास हो रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि बच्चे को सुरक्षित तलाशने के लिए हर संभव कदम उठाया जाए और परिवार को जांच की प्रगति की उचित जानकारी मिले।

कानूनी टीम ने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि मामला नाबालिग के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा है तथा देरी से बच्चे की सुरक्षित बरामदगी की संभावना प्रभावित हो सकती है। याचिका में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ, तलाशी दल गठित करने तथा पड़ोसी जिलों और विशेष एजेंसियों के साथ समन्वय और अन्य आवश्यक कानूनी जांच उपाय किये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

अधिवक्ता दिलराज मान और अधिवक्ता प्रभसिमरन मान ने कहा कि उच्च न्यायालय का रुख करने का उद्देश्य जांच में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नाबालिग से जुड़े मामले में जांच प्रभावी, शीघ्र और संवेदनशील तरीके से हो तथा बच्चे को तलाशने के लिए सभी कानूनी उपाय किये जायें।

मामले की सुनवाई 12 अगस्त 2026 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मंजू देवी बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य के रूप में हुई। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को याचिका में लगाये गये आरोपों के संबंध में प्रतिवादी नंबर तीन का संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की।

उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रभसिमरन सिंह और अधिवक्ता दिलराज सिंह के साथ अधिवक्ता साहिल कौल पेश हुए।

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