पटना , जुलाई 08 -- धुनिक हृदय चिकित्सा में सटीकता, तकनीकी उत्कृष्टता और वैश्विक विशेषज्ञता का अद्भुत संगम बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में देखने को मिला, जहाँ दो दिवसीय एडवांस्ड टेक्नीक्स इन कोरोनरी बाइफरकेशन पीसीआई वर्कशॉप का पहला दिन लाइव इमेज-गाइडेड एंजियोप्लास्टी, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और उच्चस्तरीय वैज्ञानिक विमर्श के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण एम्स पटना की कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब से इमेज-गाइडेड परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) का लाइव प्रसारण रहा। इस जटिल प्रक्रिया का सफल संचालन जापान के साइसेकाई उत्सुनोमिया हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. केनिचिरो शिमोजी तथा एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम भंभानी ने संयुक्त रूप से किया।

लाइव प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों ने इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस) के माध्यम से स्टेंट प्रत्यारोपण की वैज्ञानिक योजना, सटीक स्थापना तथा उपचार के परिणामों के मूल्यांकन की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इंट्राकोरोनरी इमेजिंग न केवल जटिल कोरोनरी रोगों के उपचार को अधिक सुरक्षित बनाती है, बल्कि प्रिसिजन पीसीआई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

इसके बाद आयोजित इंटरैक्टिव पैनल चर्चा में वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.शमशाद, डॉ. आशीष झा एवं डॉ. विपिन कुमार ने कोरोनरी बाइफरकेशन घावों के उपचार की नवीनतम रणनीतियों, तकनीकी चुनौतियों और व्यवहारिक अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। वहीं, वरिष्ठ कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. प्रगति कपूर ने वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता करते हुए अकादमिक चर्चाओं को समृद्ध किया।

कार्यशाला का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. भानु दुग्गल, प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी एवं कुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, जापान से पधारे विशेषज्ञ डॉ. केनिचिरो शिमोजी, चिकित्सा अधीक्षक, डीनगण, कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, संकाय सदस्य तथा राष्ट्रीय कोर्स निदेशक डॉ. अनुपम भंभानी उपस्थित रहे।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. अनुपम भंभानी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक सिमुलेशन तकनीकें अब चिकित्सकों को वास्तविक मरीजों पर प्रक्रिया करने से पहले जटिल परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास करने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इससे न केवल तकनीकी दक्षता बढ़ती है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

अपने संबोधन में ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक हृदय चिकित्सा का भविष्य सटीक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर कौशल विकास पर आधारित है। उन्होंने युवा हृदय रोग विशेषज्ञों का आह्वान किया कि वे नवीनतम इंटरवेंशनल तकनीकों में दक्षता प्राप्त कर मरीजों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित एवं साक्ष्य-आधारित उपचार उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाएँ।

मुख्य अतिथि डॉ. भानु दुग्गल ने युवा कार्डियोलॉजिस्टों से चिकित्सा नैतिकता, मानवीय संवेदनशीलता और तकनीकी उत्कृष्टता के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम देश में हृदय रोग उपचार की गुणवत्ता को नई दिशा देंगे।

कार्यशाला के दूसरे दिन कोरोनरी बाइफरकेशन पीसीआई की उन्नत तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ व्यापक हैंड्स-ऑन सिमुलेशन प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। युवा कार्डियोलॉजिस्ट अत्याधुनिक सिमुलेटरों पर विभिन्न जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों में बाइफरकेशन स्टेंटिंग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास करेंगे, जिससे उनकी प्रक्रियात्मक दक्षता और निर्णय क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।

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