चंडीगढ़ , मार्च 14 -- अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने पुलिस द्वारा सर्विस सिक्योरिटी एवं अन्य मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अध्यापकों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन और अश्रुगैस के गोले दागने की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है और इसके लिए पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराया और उसकी घोर निन्दा की।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने शनिवार को जारी प्रेस बयान में कहा कि पंजाब सरकार पुरानी पेंशन बहाली सहित कर्मचारियों से किये गये चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। पंजाब सरकार डीए तक अपडेट नहीं कर पा रही है। इसको लेकर कर्मचारी और शिक्षक आंदोलन करते हैं, तो उनके ऊपर लाठी चार्ज, अश्रुगैस के गोले दागने और वाटर कैनन का प्रयोग करना आम बात हो गयी है। इससे कुछ दिन पहले ही पंजाब के मुलाजिमों और पेंशनर के ज्वाइंट फोरम द्वारा पुरानी पेंशन बहाली और अन्य मांगों को लेकर मोहाली में हुए प्रदर्शन पर भी पुलिस ने बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया था।

श्री लांबा ने दो टूक कहा कि पंजाब सरकार कर्मचारियों और टीचर्स के आंदोलन को लाठीचार्च एवं अन्य दमन एवं उत्पीड़न से दबाने का असफल प्रयास कर रही है। उन्होंने पंजाब सरकार से उच्चतम न्यायालय के पहली सितंबर, 2025 के फैसले से प्रभावित होने वाले अध्यापकों को सर्विस सिक्योरिटी देने और अन्य मांगों का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के कर्मचारी विरोधी और दमनात्मक रवैए की सभी राज्यों में चर्चा कर निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार लागू होने के बाद अगस्त, 2010 टीचर इलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) लागू किया गया था। उच्चतम न्यायालय ने पहली सितंबर,2025 को टीचर्स पर टीईटी अनिवार्य करने का फैसला दिया। इस फैसले को टीईटी लागू होने अर्थात अगस्त, 2010 से पहले से लागू कर दिया और टीईटी पास न करने वाले पहले के सभी टीचर्स को दो साल का टीईटी पास करने समय दिया गया। इस समय अवधि में टीईटी पास न करने वाले टीचर्स को अनिवार्य रिटायरमेंट देने का फैसला किया। कई राज्यों में इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की, लेकिन पंजाब सरकार ने ना तो कोई पुनरीक्षण याचिका दाखिल की और न ही विधानसभा में विधेयक पारित कर टीईटी लागू होने से पहले टीचर्स को सर्विस सिक्योरिटी देने की पहल की। इसके विपरित पंजाब सरकार ने 14 सितंबर, 2017 को टीचिंग फेलो और जिला परिषद से शिक्षा विभाग में आये टीचरों को प्रमोशन में दी छूट को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रमोशन पर रोक लगा दी और उक्त पत्र को सात फरवरी को वापस ले लिया। इस फैसले ने टीचर के आक्रोश को बढ़ाने का काम किया। इसलिए वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की।

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