श्रीनगर , सितंबर 19 -- लद्दाख में सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों पर बनाये गये पांच नये रॉक चेक डैम भीषण गर्मी के मौसम में 200 क्यूसेक से अधिक के जल प्रवाह का सफलतापूर्वक सामना करने में सफल रहे हैं। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को बताया कि लेह के पास उपशी स्थित केवल एक संरचना में मामूली दरार आने की जानकारी मिली है।

उपराज्यपाल 'एक्स' पर उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख में जल एवं कृषि स्थिरता के स्थायी समाधान के रूप में परिकल्पित इन नये रॉक चेक डैमों के उत्साहजनक परिणाम सामने आये हैं। इन चेक डैमों का निर्माण 27 मई से शुरू होकर चार महीनों के भीतर किया गया था, जब नदी में जल प्रवाह लगभग 20 क्यूसेक था।

इन संरचनाओं का निर्माण नदी के तल से ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पत्थरों का उपयोग कर किया गया है, जिसमें सीमेंट, कंक्रीट या स्टील का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं किया गया है। इस पहल का उद्देश्य इस उच्च पर्वतीय क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को बढ़ाने और कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक कम लागत वाली तथा पर्यावरण-अनुकूल पद्धति प्रदान करना है।उपराज्यपाल ने कहा, "भीषण गर्मी के दिनों में नदी का जल प्रवाह 200 क्यूसेक से अधिक दर्ज किया गया था। अब, सर्दियों की शुरुआत के साथ ही जल प्रवाह काफी घटकर लगभग 30 क्यूसेक रह गया है।"पानी के अत्यधिक दबाव से हुए किसी भी नुकसान की जांच करने तथा इन संरचनाओं की स्थिरता और मजबूती का आकलन करने के लिए हाल ही में अभियंताओं के एक निरीक्षण दल को तैनात किया गया था।

उपराज्यपाल ने बताया, "पांच रॉक चेक डैमों में से केवल लेह के पास उपशी स्थित पहले चेक डैम में मामूली दरार आने की सूचना मिली है।" उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत अभियंताओं कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान इन संरचनाओं के ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में महीन और बेहतरीन गुणवत्ता वाली धुली हुई रेत का जमाव भी पाया गया। उपराज्यपाल के अनुसार, इस रेत के जमाव ने चेक डैमों की स्थिरता को और अधिक बढ़ा दिया है।

उपराज्यपाल ने इन प्रायोगिक परियोजनाओं को 'सीखने का अमूल्य अनुभव' बताया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव भविष्य की परियोजनाओं को और अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी समझ प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि ये पहल लद्दाख के समग्र विकास, जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा हैं।

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