श्रीनगर , अक्टूबर 16 -- लद्दाख के नेताओं और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच लेह में हुई नये दौर की बातचीत के एक दिन बाद, 'एपेक्स बॉडी लेह' (एलएबी) और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (केडीए) ने केंद्र के मसौदा प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह प्रस्ताव उप-समिति की पिछली बैठकों में दिए गए आश्वासनों एवं वादों से बहुत अलग है।
एक बयान में एलएबी और केडीए ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने 15 अक्टूबर को हुई उप-समिति की बैठक के दौरान गृह मंत्रालय द्वारा पेश किये गये मसौदा प्रस्ताव की अच्छी तरह से समीक्षा की है।
बयान में कहा गया, "दोनों निकाय सैद्धांतिक रूप से इस मसौदा प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हैं क्योंकि यह उप-समिति की पिछली बैठकों में दिए गये आश्वासनों एवं प्रतिबद्धताओं से काफी अलग है। कई प्रमुख चिंताओं के अलावा यह मसौदा एक विधानसभा की मांग और अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों को संबोधित करने में विफल रहता है; इसमें लद्दाख की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप कोई प्रावधान भी शामिल नहीं है।"बयान में कहा गया, "इसके बजाय, यह नेफा जैसी व्यवस्था का प्रस्ताव देता है जो विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश के उस प्रस्ताव से काफी पीछे है, जिस पर 22 मई, 2026 की बैठक में सहमति बनी थी। यह एक न्यूनतम गारंटी थी, जिसके आधार पर एक विशेष मॉडल विकसित किया जा सकता था। इस बात को बैठक के आधिकारिक लिखित रिकार्ड में दर्ज किया गया था जिस पर बैठक के बाद तीन जुलाई को हस्ताक्षर किए गए और सहमति बनी थी।"इसमें आगे कहा गया कि प्रस्तावित संरचना प्रादेशिक परिषद मॉडल के ज्यादा करीब लगता है, जिसमें अधिक शक्तियां उपराज्यपाल के प्रशासन के पास केंद्रित हैं। यह लद्दाख के लोगों द्वारा मांगी गयी सार्थक विधायी, कार्यकारी और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय, उपराज्यपाल के प्रशासन को ही ज्यादा ताकतवर बनाता है।
एलएबी और केडीए 18 अक्टूबर को गृह मंत्रालय को एक विस्तृत जवाब सौंपेंगे, जिसमें वे अपनी आपत्तियों के बारे में विस्तार से बताएंगे और अपना पक्ष फिर से स्पष्ट करेंगे।
एलएबी और केडीए ने गृह मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे और दोनों संगठनों द्वारा सौंपे गए समझौता ज्ञापन के मसौदे को उसकी मूल भावना और पूर्ण रूप के साथ स्वीकार करे। यह एमओयू मसौदा लद्दाख के लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को दर्शाता है और उन मांगों को भी, जिनकी एलएबी और केडीए 2021 से लगातार वकालत करते आ रहे हैं।
बयान में कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जो उनकी राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को सुरक्षित रखे और उनके प्रति प्रतिबद्धता दिखायें, न कि ऐसी व्यवस्था जो उन्हें कमजोर करे। बातचीत का अगला दौर 22 अक्टूबर को दिल्ली में होना निर्धारित है।
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