श्रीनगर , मई 23 -- लद्दाख की पुगा घाटी में समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर भारत की पहली भू-तापीय ऊर्जा परियोजना विकसित की जा रही है। तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) द्वारा संचालित इस पायलट परियोजना का उद्देश्य चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाली स्वच्छ, शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रदान करना और क्षेत्र के कृषि, पर्यटन तथा अंतरिक्ष-तापन को बढ़ावा देना है।

गौरतलब है कि लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख की पुगा घाटी में भारत का पहला भू-तापीय ऊर्जा परियोजना लगाने के लिए ओएनजीसी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) को 5 साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।

समझौता ज्ञापन के मुताबिक ओएनजीसी लद्दाख में भू-तापीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पूगा घाटी में एक मेगावाट इलेक्ट्रिक का पायलट भू-तापीय ऊर्जा संयंत्र लगाएगा, साथ ही एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार करेगा। भू-तापीय ऊर्जा पृथ्वी की पपड़ी के नीचे से निकाली गई गर्मी है। यह अक्षय ऊर्जा धरती के कोर से निकलती है और आस-पास की चट्टानों और जमीन के नीचे पानी के जल स्रोत को गर्म करती है।

अभी तक भारत में कोई बड़े पैमाने का व्यावसायिक भूतापीय ऊर्जा संयंत्र नहीं है। इसलिए लद्दाख में पूगा घाटी में बन रहा भू-तापीय ऊर्जा संयंत्र देश में अपनी तरह का पहला संयंत्र होगा। एमओयू के मुताबिक ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र 2026 के काम के मौसम में ही मौजूदा भू-तापीय कुएं को 1000 मीटर तक गहरा करेगा और परियोजना के अगले चरण में 1000 मीटर गहरा एक और भू-तापीय कुआं खोदेगा। पायलट भू-तापीय ऊर्जा संयंत्र की जांच और मूल्यांकन वित्तीय वर्ष 2026-27 में होने की उम्मीद है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित