लखीसराय , जून 04 -- बिहार में लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड अंतर्गत कैदी पंचायत के मानपुर गांव स्थित बडकी पोखर की खुदाई के दौरान एक प्राचीन शिवलिंग प्राप्त हुआ है। प्रारंभिक पुरातात्विक एवं भौगोलिक आकलन के आधार पर विशेषज्ञों ने इसे 9वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के पाल काल का अवशेष होने की संभावना जताई है।
लखीसराय संग्रहालय के वरीय तकनीकी सहायक राजेश कुमार ने बताया कि शिवलिंग का स्वरूप और इसकी बनावट ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रथम दृष्टया यह किसी प्राचीन शिवलिंग का भग्नावशेष प्रतीत होता है।उन्होंने बताया कि शिवलिंग का निचला हिस्सा चौकोर अथवा अष्टकोणीय आकार का है, जबकि ऊपरी भाग बेलनाकार है। इसकी संरचना में सूक्ष्म नक्काशी और धारियों के संकेत मिलते हैं, हालांकि लंबे समय तक मिट्टी के नीचे दबे रहने तथा प्राकृतिक घर्षण के कारण इसकी बारीकियां स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही हैं।
राजेश कुमार ने बताया कि लखीसराय और इसके आसपास का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से पाल शासनकाल का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसी आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह शिवलिंग 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित हुआ होगा। उन्होंने बताया कि पाल काल में बौद्ध धर्म के साथ-साथ शैव और वैष्णव परंपराओं से जुड़ी कलाकृतियों का भी व्यापक निर्माण हुआ करता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शिवलिंग संभवतः काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है। पुरातात्विक महत्व की इस खोज से क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बारे में नई जानकारियां मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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