लखनऊ , अगस्त 15 -- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधानभवन के सामने शनिवार को 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह भव्यता, गरिमा और देशभक्ति के उत्साह के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान परिसर देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। विभिन्न राज्यों के कलाकारों की प्रस्तुतियों, पुष्प वर्षा और तिरंगे गुब्बारों ने समारोह के आकर्षण को और बढ़ा दिया।
समारोह की शुरुआत सुबह करीब 9.15 बजे राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की प्रस्तुति से हुई। भारतखण्डे संगीत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक गायन से वातावरण को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। इसके बाद 32वीं और 35वीं वाहिनी पीएसी के जवानों तथा सैन्य बैंड ने अनुशासित एवं आकर्षक प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री द्वारा तिरंगे गुब्बारों को आसमान में छोड़े जाने के साथ ही परिसर भारत माता के जयघोष से गूंज उठा।
संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को प्रमुखता दी गई। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, पूर्वांचल, अवध और पश्चिमी अंचल की लोक संस्कृति के साथ जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, गुजरात और बिहार के कलाकारों ने अपनी लोक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। 'गणपति बप्पा मोरया' और 'छठी मैया' के लोकगीतों सहित विभिन्न लोकनृत्यों ने सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश दिया।
गौरी कला मंडपम ग्रुप की ओर से भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की झांकी प्रस्तुत की गई। वाराणसी की कुमकुम रस्तोगी ने माता सीता, ऋत्विक सिंह ने भगवान राम और आयुष साहू ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई। करीब 16 कलाकारों की टीम ने इस प्रस्तुति को तैयार किया था।
माता सीता की भूमिका निभाने वाली कुमकुम रस्तोगी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुति देना उनके लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने बताया कि टीम ने करीब पांच दिन तक संगीत नाट्य अकादमी में अभ्यास किया। भारतखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की टीम ने कथक और लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें 20 कलाकारों ने कथक और छह ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया। कथक के अंतर्गत तराना पेश किया गया। वहीं मथुरा-वृंदावन से आए रवि शंकर ने शंख वादन से वातावरण को आध्यात्मिक रंग दिया।
छत्तीसगढ़ से आए 19 सदस्यीय दल ने बस्तर की प्रसिद्ध लोक कला 'रेला पाटा' प्रस्तुत की। दल के नेतृत्वकर्ता कुलभूषण चंद्राकर ने बताया कि कलाकारों ने करीब एक सप्ताह तक प्रस्तुति की तैयारी की थी। उन्होंने कहा कि लखनऊ में भगवान राम की धरती पर बस्तर की संस्कृति प्रस्तुत करना उनके लिए गौरव की बात है।
अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से समारोह की शोभा बढ़ाई। महाराष्ट्र के 22 सदस्यीय दल ने करीब एक सप्ताह तक तैयारी की थी। कलाकारों ने अलग-अलग राज्यों के दलों के साथ एक मंच साझा करने को यादगार अनुभव बताया।
समारोह के दौरान आसमान से हुई पुष्प वर्षा ने लोगों में खासा उत्साह पैदा किया। इसके बाद तिरंगे गुब्बारों के आसमान में उड़ने का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों और आम लोगों के हाथों में तिरंगा तथा उनके चेहरों पर खुशी पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में रंगती नजर आई।
समारोह में विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सदस्य बृजलाल, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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