लखनऊ , सितंबर 1 -- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जब्त और निरुद्ध वाहनों को रखने की समस्या का जल्द समाधान होने जा रहा है। परिवहन विभाग के लिए अहिमामऊ में करीब 2.55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार डिटेंशन-डम्पिंग यार्ड का निर्माण पूरा हो गया है।

तकनीकी समिति के निरीक्षण के बाद इसे परिवहन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। यार्ड में एक साथ 237 वाहन खड़े किए जा सकेंगे।

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि यार्ड में 136 हल्के वाहन, 15 भारी वाहन और 86 दोपहिया वाहन रखने की क्षमता है। अभी पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण कार्रवाई के बाद जब्त वाहनों को कई बार थानों या खुले स्थानों पर खड़ा करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि इससे थानों में जगह की कमी के साथ यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनती है। नए यार्ड के संचालन से यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

लखनऊ नगर निगम ने ग्राम अहिमामऊ में 0.780 हेक्टेयर यानी 83,958 वर्गफीट भूमि परिवहन विभाग को निरुद्ध वाहनों की पार्किंग के लिए अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई थी। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर यहां मुख्य भवन, सुरक्षा कक्ष और चारदीवारी समेत अन्य निर्माण कार्य कराए गए। संबंधित कार्यदायी संस्था ने 21 अगस्त को सभी निर्माण कार्य पूरे होने की जानकारी दी थी।

हस्तांतरण से पहले लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और सिंचाई विभाग के अभियंताओं वाली तकनीकी समिति स्थल का निरीक्षण करेगी। समिति की रिपोर्ट के बाद यार्ड को परिवहन विभाग के सुपुर्द करने की प्रक्रिया पूरी होगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में लखनऊ के प्रवर्तन दलों ने अब तक 5,628 वाहनों का चालान किया है, जबकि 491 वाहनों को निरुद्ध किया गया।

अधिकारियों के मुताबिक पर्याप्त स्थान नहीं होने से कई मामलों में वाहनों को निरुद्ध करने के बजाय चालान कर छोड़ना पड़ता है। नया यार्ड उपलब्ध होने के बाद कार्रवाई के बाद वाहनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा। वर्तमान में पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड, पीजीआई में वाहनों को रखा जाता है। अहिमामऊ यार्ड शुरू होने के बाद आवश्यकता के अनुसार इन स्थानों पर खड़े वाहनों को भी यहां स्थानांतरित किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग स्थानों पर वाहनों के बिखरे रहने की समस्या कम होगी और उनके लिए केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित होगी।

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