चंडीगढ़ , मई 17 -- हृदय रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बिना इलाज और अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अंधापन और किडनी फेल होने जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा हृदय, किडनी और आंखों को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है।
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर रविवार को रोहतक स्थित पंडित बी डी शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस) में "कार्डियक वेलनेस" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि जिन लोगों का रक्तचाप 140/90 या उससे अधिक रहता है, अथवा जो हाई बीपी की दवा ले रहे हैं, उनमें से अधिकांश का या तो देर से पता चलता है या फिर निदान होने के बाद भी वे नियमित दवा नहीं लेते।
विशेषज्ञों ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय औसतन प्रतिदिन लगभग 10 ग्राम नमक का सेवन करते हैं, जबकि वयस्कों के लिए डब्ल्यूएचओ की सिफारिश प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की है। उन्होंने कहा कि नमक का सेवन कम करना हाई बीपी रोकने का सबसे आसान तरीका है। कार्यक्रम में सामुदायिक स्तर पर शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, क्योंकि लगभग 34 प्रतिशत वयस्क शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 30 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 18.8 करोड़ से अधिक लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। इनमें से केवल 37 प्रतिशत लोगों का ही समय पर निदान हो पाता है, 30 प्रतिशत इलाज शुरू करते हैं और मात्र 15 प्रतिशत लोग ही अपने रक्तचाप को नियंत्रित रख पाते हैं। उन्होंने कहा कि बीमारी के "साइलेंट" स्वभाव और शुरुआती चरण में लक्षण न दिखने के कारण बहुत कम लोगों को प्रारंभिक अवस्था में इसका पता चल पाता है।
डॉ. पुरोहित ने बताया कि जिन लोगों का रक्तचाप 180/120 या उससे अधिक होता है, उनमें तेज सिरदर्द, सीने में दर्द, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ, मतली, उल्टी, धुंधला दिखाई देना, भ्रम, कानों में आवाज आना, नाक से खून बहना और दिल की धड़कन अनियमित होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि सुरक्षित और कम खर्च वाले इलाज उपलब्ध होने के बावजूद कई लोग समय पर उपचार न लेने के कारण गंभीर जटिलताओं का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि उच्च रक्तचाप में कई बार लैब रिपोर्ट में असामान्य परिणाम तब दिखाई देते हैं जब शरीर के अंगों को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बुजुर्गों के अलावा परिवार में उच्च रक्तचाप का इतिहास रखने वाले युवा, मोटापे से ग्रस्त लोग, शारीरिक रूप से निष्क्रिय व्यक्ति, अधिक नमक, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने वाले, अत्यधिक शराब सेवन करने वाले, मानसिक तनाव से ग्रस्त और अनियमित नींद लेने वाले लोग उच्च रक्तचाप के अधिक खतरे में रहते हैं।
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