चंडीगढ़ , अक्टूबर 06 -- हरियाणा में मृत्यु के कारणों से जुड़ी जानकारी की उपलब्धता और गुणवत्ता बेहतर करने के लिए रोहतक जिले में आईसीएमआर-वित्तपोषित वर्बल ऑटोप्सी परियोजना का पायलट परीक्षण किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के लिए रोहतक को पायलट जिला चुना गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि परियोजना की करीब आठ महीने की कार्यान्वयन अवधि में लगभग 5,000 मौतों को शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य प्रणाली के नामित कर्मी पात्र मौतों की पहचान कर मोबाइल आधारित एप्लीकेशन के माध्यम से वर्बल ऑटोप्सी साक्षात्कार करेंगे। इसके बाद एक मेडिकल ऑफिसर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी की समीक्षा कर मृत्यु का संभावित कारण तय करेगा।
परियोजना का उद्देश्य मौत की परिस्थितियों और संभावित कारणों से जुड़ा व्यवस्थित डेटा जुटाना है, जिससे जिला स्तर पर मृत्यु दर के पैटर्न को समझने और साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।
परियोजना को मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से जिला स्वास्थ्य प्रशासन के समन्वय से संचालित किया जाएगा। इसमें कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और मेडिकल ऑफिसर शामिल होंगे। प्रत्येक पूर्ण वर्बल ऑटोप्सी के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और जानकारी की समीक्षा कर मृत्यु का कारण तय करने वाले मेडिकल ऑफिसर को 100-100 रुपये मानदेय दिया जाएगा।
वर्बल ऑटोप्सी साक्षात्कार निर्धारित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से किए जाएंगे। संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यप्रणाली और डिजिटल प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। परियोजना से मृत्यु के कारणों की जानकारी के दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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