चंडीगढ़ , मई 09 -- पंजाब सरकार ने सिंचाई ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रोपड़ नहर नेटवर्क का पानी अब अंतिम छोर के गांवों तक पहुंचा दिया है। इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से भूजल पर निर्भर थे।
पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने शनिवार को बताया कि वर्ष 2025-26 में रोपड़ नहर नेटवर्क के तहत सिंचित क्षेत्र 29,488 एकड़ से बढ़कर 85,447 एकड़ हो गया है। इसके अलावा 3,882 एकड़ और क्षेत्र जोड़ा जा रहा है, जिससे कुल सिंचित क्षेत्र 89,329 एकड़ तक पहुंच जाएगा। यह लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी सरकार बनने के समय पंजाब में नहरी पानी का उपयोग केवल 26.5 प्रतिशत था। इसके बाद सरकार ने उपेक्षित नहरों, डिस्ट्रीब्यूटरी और वाटर कोर्स की बड़े स्तर पर सफाई, मरम्मत और पुनर्जीवन का कार्य शुरू किया। श्री गोयल ने कहा कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं और राज्य ने अपने तय लक्ष्य का करीब 78 प्रतिशत नहरी सिंचाई कवरेज हासिल कर लिया है। सरकार का उद्देश्य धान सीजन से पहले हर किसान तक नहरी पानी पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि लुधियाना और मालेरकोटला क्षेत्र के रुदका, पंडोरी, जंगपुरा, धत्त, ढलेर कलां, नुथेहरी, मानखेड़ी, सुल्तानपुर, भूदन, भद्रावां, बरूंदी, राशिन, तुंगाहेड़ी और कंगनवाल जैसे गांवों में करीब चार दशक बाद खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है, जिससे किसानों में नयी उम्मीद जगी है।
श्री गोयल ने कहा कि इस बदलाव में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के पुनर्जीवन और विस्तार की अहम भूमिका रही है। समलाह, पहाड़पुर, लाखेर और मिधवां गांवों में राइजर और स्टोरेज टैंक जैसे ढांचे तैयार किये गये हैं। श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं से अतिरिक्त 3,882 एकड़ भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी। उन्होंने बताया कि लंबे समय से बंद पड़ी लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों को भी दोबारा चालू किया गया है। पुराने पाइपलाइन, पंप, कंट्रोल पैनल और पंप हाउस की मरम्मत की गयी, जबकि किसानों ने भी खेत स्तर पर ढांचे को बेहतर बनाने में सहयोग दिया।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से रोपड़ जिले की नंगल तहसील में 1,539 एकड़ अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में लायी गयी है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है और वे बेहतर जल प्रबंधन पद्धतियां अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल सिंचाई आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि टिकाऊ खेती, भूजल पर निर्भरता कम करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। पंजाब सरकार किसानों के जीवन को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ राज्य के सबसे महत्वपूर्ण संसाधन पानी की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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