नैनीताल , जुलाई 07 -- उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों की ट्रेड यूनियन में निगम अधिकारियों के कथित हस्तक्षेप से जुड़े मामले में श्रम आयुक्त और ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को दोनों पक्षों की सुनवाई कर 10 सप्ताह के भीतर विधि सम्मत निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि श्रम आयुक्त और रजिस्ट्रार यह स्पष्ट करें कि किस आधार पर परिवहन निगम के अधिकारी ट्रेड यूनियन के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि ट्रेड यूनियन के मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार श्रम आयुक्त अथवा ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को है, निगम के अधिकारियों को नहीं।
याचिका रोडवेज कर्मचारी यूनियन की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि यूनियन ट्रेड यूनियन नियमावली के तहत विधिवत पंजीकृत है और सेवा नियमों के अनुसार परिवहन निगम का कोई भी कर्मचारी संघ की सदस्यता ले सकता है। यदि कोई सदस्य यूनियन के नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त करने का अधिकार केवल यूनियन के पास है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि वर्तमान में परिवहन निगम के अधिकारी यूनियन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर उसकी कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि ऐसा करना नियमों के विपरीत है। याचिका में न्यायालय से निगम अधिकारियों को यूनियन के मामलों में हस्तक्षेप से रोकने का अनुरोध किया गया है।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने श्रम आयुक्त और ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वे निगम अधिकारियों और कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों से वार्ता कर दोनों पक्षों को सुनें तथा 10 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित