काठमांडू , मार्च 27 -- रैपर से राजनेता बने बालेन्द्र शाह ने चार साल में नेपाल की राजनीति के शीर्ष तक का सफर पूरा कर लिया है। राजनीति में शून्य से अपनी शुरूआत करने वाले श्री शाह शुक्रवार को शपथ लेने के बाद नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गये।
काठमांडू में 27 अप्रैल 1990 को जन्मे श्री शाह इससे पहले 2022 से 2026 तक काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
श्री शाह का जन्म एक नेवार बौद्ध परिवार में हुआ। उनके पिता आयुर्वेद के चिकित्सक थे। उन्होंने काठमांडू के हिमालयन व्हाइटहाउस इंटरनेशनल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक हासिल किया। इसके बाद भारत आकर 2018 में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की।
राजनीति में आने से पहले शाह नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप (नेफहॉप) संगीत जगत में सक्रिय थे। उनका गीत 'सड़क बालक' 2012 में रिलीज हुआ और 2013 में 'रॉ बार्ज़' रैप-बैटल मंच के माध्यम से उन्हें व्यापक पहचान मिली। उनके गीतों में भ्रष्टाचार, असमानता और युवाओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
लोकप्रिय होने के बाद श्री शाह ने राजनीति का रुख किया और दिसंबर 2021 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने की घोषणा की। श्री शाह के गीतों के मुद्दे उनकी राजनीति में भी हूबहू आ गये। उन्होंने अपने चुनाव अभियान में पारंपरिक प्रचार के तरीकों के बजाय सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग करते हुए भ्रष्टाचार विरोध, पारदर्शिता, शहरी सुधार, कचरा प्रबंधन और यातायात व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
इस नये रास्ते के जरिये वह युवाओं से बेहतर तरीके से जुड़ सके और 2022 में काठमांडू के पहले निर्दलीय मेयर निर्वाचित हुए।
मेयर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कुछ निर्णयों को लेकर आलोचनाएं भी सामने आईं। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने अतिक्रमण हटाने और सड़क विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। इसके अलावा 2023 में एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी विवाद हुआ।
छिटपुट आलोचनाओं के बावजूद श्री शाह एक लोकप्रिय नेता बने रहे। सितंबर 2025 में नेपाल में जेनरेशन-ज़ेड नेतृत्व वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन सरकार का पतन हो गया और अंतरिम सरकार का गठन किया गया। इस राजनीतिक बदलाव के बीच श्री शाह एक प्रमुख राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे।
श्री शाह युवाओं के इस विरोध का चेहरा माने गये। उन्होंने इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील भी की।
श्री शाह दिसंबर 2025 में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हुए और जनवरी 2026 में मेयर पद से इस्तीफा देकर संसदीय चुनाव मैदान में उतरे। मार्च 2026 के आम चुनाव में उनकी पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया गया।
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