कोलकाता , मार्च 05 -- पश्चिम बंगाल अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर) ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के एक पेचीदा मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि रेस्तरां भोजन, पेय और हुक्का को एक ही श्रेणी में नहीं रख सकते, भले ही उन्हें एक ही मेज पर परोसा गया हो।

प्राधिकरण ने कहा कि रेस्तरां में परोसे जाने वाले गैर-तंबाकू वाले हुक्के पर 18 प्रतिशत और तंबाकू आधारित हुक्के पर 40 प्रतिशत (लागू उपकर के साथ) जीएसटी देना होगा न कि पांच फीसदी, जैसा कि इस मामले में रेस्त्रां मालिक का दावा है।

प्राधिकरण ने इस मामले में 'पप्पू चायवाला' नामक एक रेस्तरां ब्रांड के आवेदन पर सुनवाई करते हुए कहा कि जीएसटी नियमों के तहत 'मानव उपभोग की किसी भी अन्य वस्तु' में तंबाकू या गैर-तंबाकू वाले हुक्के शामिल नहीं हो सकते। प्राधिकरण के अनुसार, भोजन और हुक्का दो अलग-अलग कर योग्य वस्तुएं हैं।

दरअसल कई रेस्तरां हुक्का सेवा, को रेस्तरां सेवा का ही हिस्सा मानते हुए पूरे बिल पर पांच प्रतिशत के रेट से जीएसटी कर वसूल कर रहे थे। हालांकि, एएआर ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि हुक्का एक स्वतंत्र सेवा नहीं है और यह केवल भोजन के साथ दी जाने वाली आतिथ्य सेवा का हिस्सा है। इसलिए हुक्का पर वही कर लगेगा जो भोजन परोसने पर लगता है। प्राधिकरण ने इस तर्क को नहीं माना।

प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि 'धुआं' के सेवन किसी भी रूप में 'खाद्य पदार्थ' की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए इसे रेस्तरां में मिलने वाली सामान्य सेवा के तहत लगने वाले टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

करों के जानकारों के अनुसार, इस फैसले से उन रेस्त्रांओं को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने पांच फीसदी की दर से कर वसूला है लेकिन अब उनको नए करों पर टैक्स जमा करना पड़ेगा।

इस वजह से रेस्तरां उद्योग ने इस फैसले पर चिंता जताई है।

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