नयी दिल्ली , अक्टूबर 06 -- भारतीय रेलवे ने 40 घंटे से अधिक की यात्रा करने वाली 11 लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता और रखरखाव के उपाय तेज कर किये हैं। इस पहल के तहत जवाबदेही बढ़ाई गई है और समय दर्ज करने वाली तस्वीरों के जरिए निरीक्षण, हर दो घंटे में कचरा संग्रह तथा रास्ते में ही छोटी-मोटी मरम्मत की व्यवस्था की गयी है, ताकि पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलती रहें।

सभी क्षेत्रीय रेलवे के महाप्रबंधकों को जारी निर्देश में रेलवे बोर्ड के सदस्य (गाड़ी पार्टस एवं इंजन व्यवस्था) और पदेन सचिव आर. राजगोपाल ने कहा कि लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान ट्रेनों की स्वच्छता और रखरखाव 'उच्च प्राथमिकता का विषय' है। उन्होंने शुरुआती स्टेशन से लेकर गंतव्य तक लगातार निगरानी करने को कहा। गत तीन अक्टूबर को जारी निर्देश में रवाना होने के समय ट्रेन की सफाई के बजाय पूरी बहुदिवसीय यात्रा के दौरान स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

रेलवे बोर्ड ने कहा, "उद्देश्य केवल शुरुआती स्टेशन पर सुधार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि गंतव्य तक पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन की स्वच्छता और सेवा-योग्यता बनाए रखना होना चाहिए।"बेहतर निगरानी के लिए चुनी गयी 11 ट्रेनों में विवेक एक्सप्रेस, अवध असम एक्सप्रेस, आरकेएमपी-अगरतला एक्सप्रेस, एडीआई-एसएचसी एक्सप्रेस, डीएनआर-एसएमवीबी एक्सप्रेस, पुणे-सौ एक्सप्रेस, अमरपाली एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, आरजीडी-एलटीटी एक्सप्रेस, एचडब्ल्यूएच-वाईपीआर एक्सप्रेस और एएसआर-गरीबरथ एक्सप्रेस शामिल हैं। इनमें डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस की यात्रा सबसे लंबी 4,158 किलोमीटर है और इसका परिचालन चक्र 170 घंटे का है।

डिब्रूगढ़-लालगढ़ अवध असम एक्सप्रेस 3,117 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका परिचालन चक्र 148 घंटे का है, जबकि आरकेएमपी-अगरतला एक्सप्रेस 2,490 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका परिचालन चक्र 121 घंटे का है। सूची में पंजाब और जम्मू से जुड़ी दो महत्वपूर्ण ट्रेनें भी शामिल हैं। इनमें कटिहार-अमृतसर अमरपाली एक्सप्रेस 1,808 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका परिचालन चक्र 95 घंटे का है, जबकि पुणे-जम्मू तवी झेलम एक्सप्रेस 2,173 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका परिचालन चक्र 94 घंटे का है। अमृतसर-सहरसा गरीबरथ एक्सप्रेस को भी बेहतर निगरानी के दायरे में रखा गया है। यह ट्रेन 1,716 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका परिचालन चक्र 66 घंटे का है।

रेलवे बोर्ड ने कहा कि इन ट्रेनों की लंबी यात्रा अवधि के कारण साफ-सफाई, शौचालय, कचरा प्रबंधन और डिब्बों में उपलब्ध सुविधाओं में कमी को समय पर दूर नहीं किए जाने पर 'यात्रियों के अनुभव पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।' निर्देश के तहत मंडल रेल प्रबंधकों को अपने मंडलों में लंबी दूरी की ट्रेनों के प्रदर्शन की निगरानी करने और इसकी जिम्मेदारी लेने को कहा गया है, ताकि यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें। जहां रास्ते में निरीक्षण केंद्र निर्धारित किए गए हैं, वहां बार-बार आने वाली शिकायतों या कमियों के मूल कारणों का विश्लेषण कर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं।

संबंधित डिपो यात्रा के दौरान ट्रेनों की स्वच्छता और रखरखाव की निगरानी करेंगे। रखरखाव पर्यवेक्षक और कोच अधिकारी अपनी-अपनी निर्धारित ट्रेनों के लिए जिम्मेदार होंगे।

क्षेत्रीय रेलवे के अधिकारी यात्रियों की शिकायतों और उनके समाधान सहित स्वच्छता की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। रेल मदद के माध्यम से दर्ज यात्रियों की शिकायतों को सफाई व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों और रेलवे अधिकारियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन में अधिक महत्व दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने कहा कि कोच में सफाई व्यवस्था से जुड़ी ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) का विवरण सीएमएम पोर्टल पर रेल मदद से जोड़ दिया गया है, जिससे शिकायतों का पता लगाया जा सकेगा। ओबीएचएस एजेंसियों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। क्षेत्रीय रेलवे को लंबी दूरी की ट्रेनों का प्रबंधन करने वाले डिपो पर्यवेक्षकों और अधिकारियों के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक तय करने को कहा गया है। इसके तहत गंदे डिब्बों, शौचालयों और अन्य संबंधित समस्याओं की यात्रियों की शिकायतों को ट्रेन के रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों के औपचारिक मूल्यांकन में शामिल किया जा सकता है।

रेलवे ने निगरानी के लिए एक और व्यवस्था शुरू की है, जिसके तहत अधिकारियों को डिब्बों और शौचालयों की समय दर्ज वाली तस्वीरें लेनी होंगी। डिब्बों और शौचालयों की स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें शुरुआती और गंतव्य स्टेशनों के साथ-साथ निर्धारित रास्ते के निरीक्षण केंद्रों पर भी ली जाएंगी। इससे पूरी यात्रा के दौरान स्वच्छता का दृश्य रिकॉर्ड उपलब्ध होगा और अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कमी कहां हुई। निर्धारित क्लीन ट्रेन स्टेशन (सीटीएस) पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

सीटीएस वाले स्थानों के जिम्मेदार मंडलों को रास्ते में सफाई के लिए पर्याप्त कर्मचारियों, सामग्री और उपकरणों की व्यवस्था करनी होगी। सीटीएस टीमों की प्रभावशीलता की जिम्मेदारी संबंधित मंडल की होगी। बोर्ड ने केवल स्वच्छता तक सीमित न रहते हुए छोटी-मोटी रखरखाव संबंधी समस्याओं को भी रास्ते में ही दूर करने का निर्देश दिया है, ताकि उन्हें ट्रेन के अंतिम गंतव्य तक पहुंचने तक लंबित न रखा जाए। ओबीएचएस कर्मचारियों को छोटी-मोटी मरम्मत करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा और सीटीएस केंद्रों को छोटे स्तर की मरम्मत के लिए आवश्यक उपकरणों से लैस किया जाएगा।

इन स्थानों पर तत्काल कार्रवाई के लिए प्लंबर, बिजली मिस्त्री और अन्य रखरखाव कर्मचारियों की समर्पित टीमें तैनात की जा सकती हैं। यदि कोई खराबी मिलती है तो ट्रेन के पहुंचने से पहले संबंधित सीटीएस केंद्र को इसकी जानकारी दी जाएगी, ताकि रखरखाव कर्मचारी तत्काल मरम्मत के लिए तैयार रहें।

मंडलीय नियंत्रण कक्षों को भी सीटीएस केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।

ट्रेनों की शुरुआती या बेस डिपो पर और फिर निर्धारित रास्ते के स्थानों पर पूरी तरह जांच की जाएगी, ताकि 'पूरी यात्रा के दौरान प्रभावी और बिना किसी बाधा के संचालन' सुनिश्चित किया जा सके। यह उन ट्रेनों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो कई दिनों तक सेवा में रहती हैं, क्योंकि खराब शौचालय यात्रियों की शिकायतों का बड़ा कारण बन सकता है।

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