प्रयागराज , जुलाई 24 -- भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल करते हुए उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के प्रयागराज मंडल से ट्रेन के एक आईसीएफ स्लीपर कोच पर सात किलोवाट पीक क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किया है। इस परियोजना को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। ट्रायल सफल रहने पर इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह की पहल पर शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य रेलवे को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ट्रेनों में विद्युत आपूर्ति के लिए पहियों से जुड़े अल्टरनेटर के माध्यम से बैटरियां चार्ज की जाती हैं। ट्रेन के लंबे समय तक स्टेशन पर खड़ी रहने की स्थिति में बैटरियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नई व्यवस्था में कोच की छत पर लगाए गए सोलर पैनल सूर्य की ऊर्जा से बिजली उत्पन्न कर बैटरी बैंक को चार्ज करेंगे, जिससे ट्रेन के स्टेशन पर खड़े रहने के दौरान भी पंखे, लाइट और अन्य आवश्यक विद्युत उपकरण निर्बाध रूप से संचालित रहेंगे।
रेलवे के अनुसार इस सोलर प्रणाली से प्रत्येक कोच में प्रतिवर्ष लगभग 13,500 यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। इससे प्रति कोच करीब तीन लाख रुपये की वार्षिक बचत होने का अनुमान है। साथ ही प्रति कोच लगभग 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
उत्तर मध्य रेलवे ने परियोजना के विस्तार की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। झांसी स्थित सीएमएलआर वर्कशॉप तथा रेल कोच नवीनीकरण कारखाना में प्रतिमाह दो रूफटॉप सोलर युक्त कोच तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पायलट परियोजना के सफल रहने पर ऐसे कोचों को चरणबद्ध तरीके से नियमित ट्रेनों में शामिल किया जाएगा।
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