नयी दिल्ली , अक्टूबर 16 -- कांग्रेस ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दिल्ली आने के बजाय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुंबई में बैठक करने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाये हैं।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शुक्रवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुंबई में बैठक से संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि यह भारत की कमजोर विदेश नीति का परिणाम है, विशेषकर अमेरिका के साथ संबंधों के मामले में भारत की विदेश नीति बहुत कमजोर है।

उन्होंने कहा कि जब भारतीय नागरिकों को हथकड़ी लगाकर बिना सम्मान और अधिकारों के भारत वापस भेजा गया, तब प्रधानमंत्री ने आवाज नहीं उठाई। एच-1बी वीजा शुल्क के मुद्दे पर भी वह चुप रहे, जिसका सबसे अधिक असर भारतीयों पर पड़ा। उन्होंने कहा कि जब बड़ी अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों को भारतीयों को नौकरी देने से हतोत्साहित किया गया और अमेरिका ने भारत के तेल खरीदने के फैसले में हस्तक्षेप किया, तब भी सरकार चुप रही।

कांग्रेस नेता ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्धविराम की घोषणा अमेरिका की ओर से की गई थी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 150 से अधिक बार इसका दावा दोहरा चुके हैं, लेकिन भारत सरकार ने इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में प्रधानमंत्री से ट्रंप के दावों का स्पष्ट खंडन करने को कहा था और यह बताने का अवसर दिया था कि युद्धविराम का फैसला भारत ने स्वयं लिया था तथा इसमें कोई विदेशी हस्तक्षेप या बाहरी दबाव नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे।

श्री खेड़ा ने कहा कि जब देश के साथ गलत व्यवहार हो रहा हो और सरकार हर कदम पर चुप रहे, तो ऐसी स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्री को अमेरिकी विदेश मंत्री की ओर से अपने ही देश में बुलाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह विश्वास करने योग्य है कि कोई कहे कि वह दिल्ली नहीं आ सकता और भारत के विदेश मंत्री को मुंबई आना पड़ेगा। उन्होंने इसे देश की किसी भी सरकार के कार्यकाल में भारत का सबसे बड़ा अपमान बताया।

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