वॉशिंगटन/तेहरान , जुलाई 20 -- सैनिकों की पहली खेप की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है, हालांकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका अभी भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है।

यह नया हमला लगातार नौवीं रात भी जारी रहा। ईरानी मीडिया ने देश के दक्षिणी तट और उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज़ में धमाकों की खबर दी है, जिससे संकेत मिलता है कि हमलों का दायरा बढ़ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये नये हमले युद्ध में मारे गए "शायद तीन महान देशभक्तों" के सम्मान में किये गये है।उन्होंने मारे गये सैनिकों ऐसे सैनिक बताया जिन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हो सके।

फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले के बाद वाशिंगटन लौटने पर श्री ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "हमने आज रात उन्हें फिर से बहुत ज़ोरदार तरीके से मारा।

अमेरिका के केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने बाद में पुष्टि की कि उसने लगातार नौवीं रात अभियान पूरा कर लिया है, जिसमें ईरानी सैन्य कमान केंद्र, हवाई रत्रा और तटीय निगरानी केंद्रों, समुद्री क्षमताएं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च केंद्र और संचार नेटवर्क को लक्षित किया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान की होर्मुज जलडमरुमध्य के ज़रिए वाणिज्यिक जहाजों को खतरा पहुंचाने की क्षमता को और कम करना था।

श्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध और प्रशासन का यह रुख बनाए रखा कि सैन्य दबाव और बातचीत एक साथ हो सकती है।

बढ़ते टकराव से वैश्विक ऊर्जा बाजार हलचल मची हुई है। कच्चे तेल की कीमत में सोमवार को तीन प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गई और यह 11 जून के बाद पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गयी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जहाज पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गयी है।

ईरान के तेवर और भी आक्रामक हो गए हैं और आईआरजीसी ने कई बयान जारी किये हैं।

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, लोरेस्तान प्रांत से कथित "दुश्मन के ठिकानों" की ओर नयी मिसाइलें दागी गयीं। वहीं, आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने सीरिया में अल-तनफ स्थित अमेरिकी बेस पर हमला किया। यह हमला उन अमेरिकी हमलों के जवाब में किया गया था, जिनमें ईरान के सैनिकों की मौत हुई थी।

सेंटकॉम ने पहले ईरान के उस दावे को खारिज कर दिया था कि बेस पर हमला हुआ था।

एक अन्य बयान में आईआरजीसी ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में विस्फोट हो गया। ये टैंकर अमेरिकी दबाव में एक असुरक्षित रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे।

सेना ने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहेंगे, तब तक यह रणनीतिक जलमार्ग "तेल और गैस की एक बूंद के लिए भी" असुरक्षित रहेगा। साथ ही, अमेरिकी सेना के खिलाफ और सज़ा देने वाली कार्रवाई की धमकी भी दी।

आईआरजीसी ने दावा किया कि जॉर्डन से मिली खुफिया जानकारी की मदद से अल-अजराक और अकाबा में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये गये, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।

इस सैन्य अभियान के कारण अमेरिका में यह अटकलें तेज हो गयी हैं कि इन हमलों का मकसद केवल टकराव के एक बड़े चरण के लिए रास्ता तैयार करना है, अगर कूटनीति आखिरकार विफल हो जाती है। अमेरिका और ईरान दोनों के सार्वजनिक बयानों से एक अधिक जटिल रणनीति का संकेत मिलता है।

श्री रुबियो की टिप्पणियां अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पहले की बातों से मिलती-जुलती हैं, जिन्होंने तर्क दिया था कि सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।

ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाघेर घालीबाफ ने भी इसी तरह सैन्य कार्रवाई और बातचीत को देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरक साधन बताया।

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