रांची , अक्टूबर 14 -- झारखंड स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के तहत बुधवार को रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के प्रशासनिक भवन में चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।

इसमें वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर भी शामिल हुए। चिकित्सकों ने सुरक्षा, स्टाइपेंड, हॉस्टल, फैकल्टी की कमी और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए सरकार से जल्द समाधान की मांग की। उन्होंने 22 अक्टूबर से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार का समर्थन भी किया।

प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) का लाभ देने और स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की। इसके अलावा समयबद्ध पदोन्नति, नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन और सिंगल विंडो लाइसेंस व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।

पूर्व जेडीए अध्यक्ष डॉ. जयदीप चौधरी ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप फैकल्टी और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसका असर पढ़ाई और चिकित्सकीय प्रशिक्षण पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि दुमका मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में पिछले महीने तीन दिनों तक पानी की आपूर्ति नहीं हुई थी। वहीं, पलामू मेडिकल कॉलेज में कई घंटे तक बिजली नहीं रहती है। रिम्स में भी ऐसी समस्याएं हैं। जूनियर डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड नहीं मिलने की समस्या भी गंभीर है।

पूर्व जेडीए अध्यक्ष डॉ. विकास ने कहा कि इलाज के दौरान चिकित्सकों के साथ मारपीट की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। हर मरीज का इलाज सफल होना संभव नहीं है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टरों के साथ हिंसा उचित नहीं है। चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

झारखंड आईएमए के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में भवनों के साथ प्रशिक्षित कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों, शोध और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करना चाहिए। आंदोलन में डॉ. अजीत कुमार, डॉ. अभिषेक रामाधीन सहित कई चिकित्सक शामिल हुए।

चिकित्सकों ने सरकार से समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने और जवाबदेही तय करने के लिए संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की मांग की।

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