रांची , सितम्बर 03 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य के प्रतिष्ठित संस्थान रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) के निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए प्रकाशित विज्ञापन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
श्री मरांडी ने विज्ञापन में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी और आवश्यक योग्यताओं का उल्लेख नहीं किए जाने का आरोप लगाया है।
श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि रिनपास में निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए 26 अगस्त 2026 को प्रकाशित विज्ञापन को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा निदेशक पद की नियुक्ति के लिए बनाई गई नई नियमावली को रद्द कर एनएमसी के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नया विज्ञापन जारी किया जाए।
पत्र में श्री मरांडी ने कहा है कि रिनपास जैसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थान का संचालन कई वर्षों से प्रभारी निदेशक के माध्यम से किया जा रहा है। इससे संस्थान के सुचारू और व्यवस्थित संचालन में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। खासकर वित्तीय और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में प्रभारी निदेशक की निर्णय लेने की सीमाओं का असर संस्थान के प्रशासन पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया, लेकिन इसमें दो गंभीर त्रुटियां हैं। पहली, विज्ञापन में निदेशक पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता अथवा अहर्त्ता का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। मरांडी ने इसे नियुक्ति प्रक्रिया की एक बड़ी खामी बताया है।
दूसरी आपत्ति एनएमसी के नियमों को लेकर उठाई गई है। मरांडी के अनुसार चिकित्सा संस्थानों में निदेशक, डीन या अधीक्षक जैसे पदों पर नियुक्ति के लिए एनएमसी द्वारा निर्धारित योग्यताओं और नियमों का पालन आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि एनएमसी के प्रावधानों के अनुसार ऐसे पदों के लिए मेडिकल फैकल्टी के उम्मीदवारों को ही पात्र माना गया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग ने 14 अक्टूबर 2024 को एक अलग नियमावली बनाकर रिनपास के निदेशक पद के लिए गैर-चिकित्सा संवर्ग (नॉन मेडिकल फैकल्टी) को भी पात्रता के दायरे में शामिल कर दिया। मरांडी ने इस नियमावली को अव्यावहारिक और एनएमसी के नियमों के प्रतिकूल बताया है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नई नियमावली के पीछे किसी गैर-चिकित्सा संवर्ग के व्यक्ति को निदेशक बनाने की मंशा हो सकती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संबंधी संस्थानों का नेतृत्व अनुभवी और वरिष्ठ चिकित्सक के हाथों में होना चाहिए।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि त्रुटिपूर्ण विज्ञापन और नई नियमावली को रद्द कर एनएमसी के मापदंडों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि रिनपास को योग्य, सक्षम, ईमानदार और प्रशासनिक दक्षता रखने वाला निदेशक मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे संस्थान की गरिमा बनी रहेगी और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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