नयी दिल्ली , मई 12 -- राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अगले निदेशक की नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर औपचारिक रूप से असहमति व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर वैधानिक चयन तंत्र को केवल एक औपचारिकता बनाने और इस प्रक्रिया में विपक्ष की किसी भी सार्थक भूमिका को नकारने का आरोप लगाया।

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए गठित उच्चस्तरीय चयन समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित एक आलोचनात्मक पत्र में श्री गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों एवं आलोचकों को निशाना बनाने के लिए देश की प्रमुख जांच एजेंसी का बार-बार दुरुपयोग किया है।

श्री गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मैंने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया पर असहमति व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। मैं पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य का त्याग नहीं कर सकता। विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं है।"श्री गांधी ने आज लिखे अपने पत्र में कहा कि उन्हें समिति की कार्यवाही से असहमति व्यक्त करने के लिए विवश होना पड़ा क्योंकि योग्य उम्मीदवारों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी कथित रूप से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उनसे छिपाई गई।

श्री गांधी ने लिखा, "आपकी सरकार ने देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई का बार-बार दुरुपयोग किया है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों एवं आलोचकों को निशाना बनाना है। इस तरह के संस्थागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ही विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल किया गया है। अफसोस की बात है कि आपने इस प्रक्रिया में मुझे कोई सार्थक भूमिका नहीं दी है।"उन्होंने कहा, "बार-बार लिखित अनुरोध करने के बावजूद, मुझे योग्य उम्मीदवारों की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट या 360-डिग्री रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बजाय, मुझसे समिति की बैठक के दौरान पहली बार 69 उम्मीदवारों के मूल्यांकन रिकॉर्ड की जांच करने की अपेक्षा की गई। मुझे 360-डिग्री रिपोर्ट देने से साफ इनकार कर दिया गया।"श्री गांधी ने तर्क दिया कि चयन समिति से महत्वपूर्ण सामग्री को छिपाने से नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता कमजोर होती है।

श्री गांधी ने लिखा, "चयन समिति को महत्वपूर्ण जानकारी देने से इनकार करके सरकार ने इसे महज एक औपचारिकता बना दिया है। विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं है। मैं इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य का त्याग नहीं कर सकता।" उन्होंने आगे कहा कि वह कड़े शब्दों में अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं।

श्री गांधी की ये टिप्पणियां संस्थागत पक्षपात और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार के साथ कांग्रेस पार्टी के चल रहे टकराव में एक और तीव्र मोड़ का संकेत देती हैं। विपक्षी दलों ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ तैनात करने का बार-बार आरोप लगाया है, जिसे केंद्र सरकार लगातार नकारती रही है।

देशव्यापी परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों के बाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के मामले में कांग्रेस द्वारा सरकार पर हमले तेज किए जाने के बाद इस मुद्दे का और भी ज्यादा राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।

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