प्रयागराज , अक्टूबर 16 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ सिख समुदाय पर विवादित टिप्पणी के मामले में दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
न्यायधीश विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ के समक्ष दोनों पक्षों ने करीब दो घंटे तक दलीलें पेश कीं। याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा व अन्य की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलीलें दीं।
याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई है। इसमें राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है। वाराणसी की अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
यह मामला राहुल गांधी के सितंबर 2024 में अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है। उन्होंने कहा था कि भारत में सिख समुदाय के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि उन्हें पगड़ी और कड़ा पहनने तथा गुरुद्वारे जाने की अनुमति मिलेगी या नहीं। उन्होंने इस चिंता को सभी धर्मों से जुड़ा बताते हुए कहा था कि भारत में सभी समुदायों, भाषाओं और परंपराओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भारत की विविधता को नहीं समझने का आरोप भी लगाया था।
वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ सारनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए शिकायत दी थी। प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उन्होंने अदालत में अर्जी दाखिल की। मजिस्ट्रेट (द्वितीय) ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी थी कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से संबंधित है और उसके क्षेत्राधिकार से बाहर है।
इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने एमपी-एमएलए अदालत में निगरानी याचिका दाखिल की, जिसे 21 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया गया। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद मामला फिर वाराणसी की एसीजेएम चतुर्थ अदालत में पहुंचा। एसीजेएम नीरज त्रिपाठी ने घटना की तारीख और समय का उल्लेख नहीं होने के आधार पर अर्जी दोबारा खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने एडीजे पंचम की अदालत में फिर निगरानी याचिका दाखिल की।
राहुल गांधी ने 25 अगस्त को एमपी-एमएलए अदालत में लिखित जवाब दाखिल कर याचिका को राजनीति से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने खुद को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा था कि सिख समुदाय सहित सभी धर्मों और समुदायों के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है। उनका बयान सिख समुदाय के हितों और उसके योगदान को उजागर करने के उद्देश्य से दिया गया था।
राहुल गांधी ने यह भी तर्क दिया था कि अमेरिका में दिया गया उनका बयान सिख समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि दुनिया भर में उस समुदाय पर होने वाले कथित अत्याचारों के संदर्भ में था। उनके अनुसार, बयान से सिख समुदाय का अपमान नहीं हुआ और न ही किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुईं।
उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 208 का हवाला देते हुए कहा था कि भारत के बाहर किए गए अपराध की जांच या सुनवाई भारत में केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।
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