सुलतानपुर , जुलाई 18 -- कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ सुलतानपुर एमपी/एमएलए कोर्ट चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई शनिवार को टल गई। अब इस मामले में अगली बहस पांच अगस्त को होगी। न्यायालय रिक्त होने के कारण आज कोई सुनवाई नहीं हो सकी।

श्री गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने आज यहां बताया कि इस मामले से संबंधित एक निगरानी याचिका एडीजे कोर्ट में विचाराधीन थी। पिछली सुनवाई पर इसे निरस्त कर दिया गया था। निगरानी याचिका निरस्त होने के बाद मूल पत्रावली वापस आनी थी, जिसके बाद मामले में बहस होनी थी।

यह निगरानी याचिका एडीजे कोर्ट संख्या 5 में राहुल गांधी के वॉइस सैंपल से संबंधित थी। परिवादी विजय मिश्रा ने यह याचिका दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने 15 जुलाई को निरस्त कर दिया। याचिका में पत्रावली में संलग्न सीडी और राहुल गांधी की आवाज के नमूने का विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक लैब) से मिलान कराने की मांग की गई थी।

अदालत ने पाया कि यह प्रार्थना पत्र बेहद विलंब से दिया गया था और पूरी तरह से आधारहीन था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने अपने विवेक का सही इस्तेमाल किया है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। दूसरी ओर, परिवादी विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा है कि वे इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

इससे पहले, दो मई को एमपी/एमएलए कोर्ट ने वॉयस सैंपल मिलान की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद 21 मई को वादी के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने एमपी/एमएलए कोर्ट के सत्र न्यायालय में रिवीजन याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट ने 1 जुलाई को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुना और फैसला सुरक्षित रखते हुए 15 जुलाई की तिथि तय की थी।

दरअसल, कर्नाटक चुनाव के दौरान साल 2018 में राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी किया था। जिससे आहत होकर सुल्तानपुर के एमपी/एमएलए कोर्ट में भाजपा नेता विजय मिश्रा ने परिवाद दर्ज कराया था। कोर्ट से वारंट के बाद इस मामले में पहली बार 20 फरवरी 2024 को कोर्ट में हाजिर हुए थे जहां कोर्ट ने उन्हें 25-25 हजार के दो मुचलके पर जमानत दे दिया था। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को राहुल ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया था। अंतिम बार 20 फरवरी 2026 को राहुल गांधी कोर्ट में अपना पक्ष रखने पहुंचे थे।

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