पुणे , अप्रैल 30 -- महाराष्ट्र में पुणे की विशेष अदालत में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में गुरुवार को वीडी सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर से बहस जारी रही।

श्री सत्यकी ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके पास उस सीडी के लिए कोई न्यायिक साक्ष्य नहीं है जिसमें श्री गांधी के अपमानजनक बयान दर्ज हैं और सावरकर को 'स्वातंत्र्यवीर' की उपाधि मिलने का दस्तावेजी प्रमाण भी नहीं है।

उल्लेखनीय है कि यह शिकायत वीर सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर ने दायर की थी और यह उन टिप्पणियों से संबंधित है जो श्री गांधी ने मार्च 2023 में लंदन यात्रा के दौरान की थीं। श्री गांधी की ओर से पेश हुए वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने कार्यवाही के दाैैैैरान न्यायाधीश अमोल शिंदे की अध्यक्षता वाली अदालत में श्री सत्यकी सावरकर से खूब और लम्बी बहस की।

श्री सत्यकी ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार अरुण शौरी तथा लेखक निरंजन टाकले ने भी सावरकर के बारे में अपमानजनक ढंग से लिखा , लेकिन उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही शुरू नहीं की गयी। यह सवाल भी उठाया गया कि अंडमान की सेलुलर जेल में कैद कई अन्य क्रांतिकारियों ने भी कठोर दंड, बलिदान और कष्ट सहे थे, फिर भी वे तुलनात्मक रूप से कम लोकप्रिय रहे। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वे क्रांतिकारी इसलिए कम जाने गए क्योंकि उन पर बहुत कम काम हुआ।

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